अतिक्रमणकारियों पर कसा शिकंजा, तहसीलदार एन.के. सिन्हा की कार्यशैली बनी चर्चा का विषय, पढ़े पूरी खबर,,,,,,,

विशालपुर सारंगढ़ नईदुनिया दिलीप टंडन
सारंगढ़। तहसील सारंगढ़ में नवपदस्थ तहसीलदार एन.के. सिन्हा की कार्यशैली इन दिनों आमजन के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। राजस्व मामलों के त्वरित निराकरण और अतिक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर की जा रही कार्रवाई से जहां पीड़ित पक्षों में संतोष देखा जा रहा है, वहीं अवैध अतिक्रमण करने वालों में हड़कंप की स्थिति है।
कलेक्टर के निर्देशानुसार लंबित राजस्व प्रकरणों के शीघ्र निराकरण तथा शासकीय भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को रोकने के लिए तहसील स्तर पर विशेष पहल की जा रही है। तहसीलदार एन.के. सिन्हा द्वारा नए अतिक्रमण के मामलों में तत्काल संज्ञान लेते हुए स्थगन आदेश जारी किए जा रहे हैं, जिससे अवैध कब्जों पर शुरुआती स्तर पर ही रोक लगाई जा रही है। इसके परिणामस्वरूप अतिक्रमण की नई घटनाओं में कमी आने की बात सामने आ रही है।
जानकारी के अनुसार वर्षों से लंबित पड़े कई अतिक्रमण और राजस्व विवादों की सुनवाई में भी तेजी लाई गई है। ऐसे प्रकरण जो लंबे समय से न्यायालयीन प्रक्रिया में लंबित थे, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा रहा है। इससे पक्षकारों को समय पर न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
राजस्व न्यायालय में सुनवाई के दौरान आवश्यक मामलों में तत्काल पटवारी से प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इससे न केवल प्रकरणों के निपटारे की गति बढ़ी है बल्कि मैदानी अमले की कार्यप्रणाली में भी कसावट देखने को मिल रही है। कई पक्षकारों का कहना है कि पहले जिन मामलों में महीनों लग जाते थे, उनमें अब अपेक्षाकृत तेजी से कार्रवाई हो रही है।
तहसीलदार की कार्यशैली का एक मानवीय पक्ष भी सामने आया है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान ऐसे परिवारों के लिए व्यवस्थापन के विकल्प तलाशने का प्रयास किया जा रहा है, जो वर्षों से निवास कर रहे हैं और जिनके सामने विस्थापन की समस्या खड़ी हो सकती है। आम लोगों का मानना है कि प्रशासनिक दायित्वों के साथ मानवीय संवेदनाओं का संतुलन बनाए रखने की यह पहल सराहनीय है।
छोटे-छोटे भूमि विवादों में आपसी सहमति और समझौते के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास भी किया जा रहा है। इससे कई मामलों में न्यायालयीन प्रक्रिया की लंबाई कम होने के साथ सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में मदद मिल रही है। तहसील कार्यालय पहुंचने वाले लोगों के बीच यह कार्यशैली चर्चा का विषय बनी हुई है।
हालांकि शासकीय भूमि पर निर्मित प्रधानमंत्री आवास योजना के कुछ मकान प्रशासन के लिए चुनौती बने हुए हैं। तहसीलदार एन.के. सिन्हा ने चर्चा के दौरान बताया कि लगभग 8 से 10 प्रधानमंत्री आवास ऐसे चिन्हित हुए हैं, जो शासकीय भूमि पर निर्मित हैं। इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया और मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण है।
मलदा-बी क्षेत्र में ऐसे तीन परिवारों के प्रधानमंत्री आवास शासकीय भूमि पर निर्मित पाए गए हैं। इन मामलों में अभी तक बेदखली की कार्रवाई नहीं हो सकी है। प्रशासन द्वारा वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जा रही है।
राजस्व मामलों में बढ़ी सक्रियता, अतिक्रमण के विरुद्ध सख्त रुख और विवादों के त्वरित निराकरण की पहल से तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली में बदलाव दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में इन प्रयासों के परिणाम और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।




