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छत्तीसगढ़ कलमकार मंच की काव्य गोष्ठी में 5 पुस्तकों का लोकार्पण, 53 साहित्यकार सम्मानित, पढ़े पूरी खबर,,,,,,

साहित्यकारों के सम्मान और पुस्तक विमोचन से गुलजार हुआ कानन पेंडारी, मंच ने बनाया नया रिकॉर्ड

विशालपुर सारंगढ़ दिलीप टंडन

सारंगढ़,बिलासपुर। छत्तीसगढ़ कलमकार मंच मस्तूरी के तत्वावधान में शनिवार को कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क में पुस्तक विमोचन, काव्य गोष्ठी एवं साहित्यकार सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। प्राकृतिक वातावरण के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे साहित्यकारों की उपस्थिति में पांच पुस्तकों का लोकार्पण किया गया तथा 53 साहित्यकारों को “साहित्य विभूति सम्मान-2026” से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत कलमकारों के कानन पेंडारी जंगल सफारी भ्रमण से हुई। इसके बाद खुले प्राकृतिक परिसर में आयोजित समारोह में नवागढ़-बेमेतरा से आए गायक एवं कवि जुगेश बंजारे धीरज ने संचालन की जिम्मेदारी संभाली। बिलासपुर, बेमेतरा, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, सक्ती एवं बलौदाबाजार सहित विभिन्न जिलों से पहुंचे साहित्यकारों का पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया गया। सभी उपस्थित साहित्यकारों एवं दर्शकों ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन भी किया।

समारोह में सबसे पहले छत्तीसगढ़ कलमकार मंच के तत्वावधान में प्रकाशित “अनुभूति” राष्ट्रीय साझा संकलन का विमोचन किया गया। डॉ. किशन टंडन क्रांति के संपादन एवं सुरजीत के संकलन में प्रकाशित इस पुस्तक में देशभर के 53 साहित्यकारों का परिचय एवं उनकी रचनाएं शामिल हैं। इसके बाद डॉ. किशन टंडन क्रांति की चार नई कृतियों “दो बूंद स्याही” (हिंदी काव्य संग्रह), “सोला आना सच” (छत्तीसगढ़ी कविता संग्रह), “मेरी आवाज सुनो” (अभिव्यक्ति संग्रह) तथा “हिजगा” (छत्तीसगढ़ी कहानी संग्रह) का लोकार्पण किया गया। ये उनकी क्रमशः 78वीं, 79वीं, 80वीं एवं 81वीं प्रकाशित कृतियां हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ कलमकार मंच के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ. किशन टंडन क्रांति ने कहा कि मंच के माध्यम से अब तक 84 पुस्तकों का विमोचन हो चुका है, जो चार वर्षों के भीतर किसी भी साहित्यिक संस्था द्वारा स्थापित एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन के साथ मंच द्वारा सम्मानित साहित्यकारों की संख्या बढ़कर 1544 हो गई है, जबकि यह मंच का 27वां सफल आयोजन है।

मुख्य अतिथि एवं सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर विजय कुमार कोशले ने कहा कि साहित्य समाज को नई दिशा देने का माध्यम है। उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि कविता पाठ से मिलने वाला आत्मिक संतोष आज भी अविस्मरणीय है। इस अवसर पर उनका भी सम्मानपत्र, मेडल, पुस्तक एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।

पुस्तक विमोचन के बाद आयोजित काव्य गोष्ठी में विभिन्न जिलों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। कविताओं पर श्रोताओं की लगातार तालियां गूंजती रहीं। कानन पेंडारी भ्रमण पर आए पर्यटक भी काव्य पाठ सुनने के लिए रुकते रहे और साहित्यिक माहौल का आनंद लेते रहे।

समारोह के समापन अवसर पर सभी 53 साहित्यकारों को “साहित्य विभूति सम्मान-2026” के तहत सम्मानपत्र, मेडल एवं पुस्तकें प्रदान की गईं। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष जुगेश बंजारे धीरज, प्रचार सचिव मणिशंकर दिवाकर ‘गदगद’, डॉ. प्यारेलाल आदिले ‘तनय’, डॉ. गुलाबचंद ‘कुसुम’, चतुर सिंह चंचल, सुरजीत क्रांति, बुंदराम जांगड़े, कार्तिक पुराण घृतलहरे, हेमलता पटेल, मनोज कुमार पटेल, राजेंद्र कश्यप, अशोक बंजारे, ऐन प्रसाद घृतलहरे, मोहन दास सतऋषु, अनु भास्कर, विनीता दिनेश गेंदले, मनोज प्रधान, अजय कुमार कुर्रे, समीर निषाद, प्रोफेसर संतोष ताम्ब्रे, डॉली पटेल, अर्णव गेंदले सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं बाल-वृंद उपस्थित रहे। अंत में आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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