चार दिन की उम्मीद आखिरकार मातम में बदली, नदी से मिली लापता कार, अंदर मृत मिले पूर्व सरपंच दंपति, पढ़े पूरी खबर,,,,,

माधोपाली लात नाला हादसे का दर्दनाक अंत, चार दिनों तक बच्चों की दुआएं भी नहीं बचा सकीं मां-बाप की जिंदगी; पूरे क्षेत्र में पसरा मातम
विशालपुर सारंगढ़ नईदुनिया दिलीप टंडन
सारंगढ़। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के माधोपाली लात नाला में रविवार को हुई दर्दनाक दुर्घटना का बुधवार को बेहद दुखद अंत हो गया। चार दिनों तक चली लगातार खोजबीन, परिवार की उम्मीदें, बच्चों की प्रार्थनाएं और ग्रामीणों की दुआएं आखिरकार मातम में बदल गईं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस तथा पंजाब से पहुंचे विशेष गोताखोरों की संयुक्त टीम ने घटनास्थल से कुछ दूरी पर नदी के भीतर डूबी कार को खोज निकाला। जब कार को भारी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया तो उसके अंदर ग्राम बड़े घोटला के पूर्व सरपंच एवं देव ट्रेडर्स के संचालक देवनारायण पटेल और उनकी पत्नी सविता पटेल मृत अवस्था में मिले। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

रविवार की शाम करीब चार बजे देवनारायण पटेल अपनी पत्नी सविता पटेल के साथ व्यवसायिक कार्य से लौट रहे थे। जानकारी के अनुसार वे माधोपाली की ओर से वापस बड़े घोटला लौट रहे थे। रास्ते में माधोपाली के पुराने लात नाला पुल के पास पहुंचे। उस समय लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नाला उफान पर था और पुल के निचे पानी बह रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार पुल के ऊपर लकड़ी साइड में था उसके बगल से निकालने।के दौरान कार का एक पहिया पुल से नीचे उतर गया और देखते ही देखते वाहन अनियंत्रित होकर तेज बहाव में समा गया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कार कुछ देर तक पानी के ऊपर तैरती दिखाई दी। आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाया और वाहन तक पहुंचने का प्रयास भी किया, लेकिन न तो कार का शीशा टूट सका और न ही दरवाजा खुल पाया। कुछ ही क्षणों में तेज धारा कार को अपने साथ बहाकर ले गई और देखते-ही-देखते वह आंखों से ओझल हो गई। इसके बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई और तत्काल पुलिस तथा प्रशासन को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं। उफनती नदी, तेज बहाव और लगातार हो रही बारिश के बावजूद बचाव दल ने उसी रात से खोज अभियान शुरू कर दिया। अगले तीन दिनों तक नदी के अलग-अलग हिस्सों में गोताखोर लगातार तलाश करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली। प्रशासन ने तीन जिलों से संसाधन जुटाए और मौके पर अस्थायी कैंप बनाकर अभियान जारी रखा।
इधर परिजनों की बेचैनी हर गुजरते दिन के साथ बढ़ती जा रही थी। आखिरकार परिवार ने पंजाब के प्रसिद्ध गोताखोरों से संपर्क किया। बताया जाता है कि गोताखोरों ने कहा था कि पंजाब से सारंगढ़ पहुंचने में दो दिन लगेंगे, लेकिन वे डेढ़ दिन में ही रात करीब साढ़े तीन बजे घटनास्थल पहुंच गए। बुधवार सुबह लगभग साढ़े छह बजे उन्होंने संयुक्त टीम के साथ नदी में उतरकर नए सिरे से तलाश शुरू की। करीब तीन से चार घंटे की कठिन मशक्कत के बाद नदी की गहराई में डूबी कार का पता चल गया।
इसके बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और विशेष गोताखोरों ने संयुक्त प्रयास से कार को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। घंटों की मेहनत के बाद जब वाहन नदी से बाहर करीब चार बजे निकाला गया तो उसके अंदर देवनारायण पटेल और उनकी पत्नी सविता पटेल के शव मिले। मौके पर मौजूद लोगों के लिए यह पल बेहद भावुक और पीड़ादायक था। कई ग्रामीण अपने आंसू नहीं रोक सके। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी कर दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया तथा मर्ग कायम कर मामले की विवेचना शुरू कर दी।
सूत्रों के अनुसार कार की तलाशी के दौरान उसमें से ₹30 हजार नकद भी बरामद हुए, जिसे पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई के तहत अपने कब्जे में ले लिया।
देवनारायण पटेल केवल एक सफल व्यवसायी ही नहीं बल्कि सामाजिक रूप से भी सक्रिय और लोकप्रिय व्यक्ति थे। वे बड़े घौठला ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच रह चुके थे तथा हार्डवेयर, सरिया, सीमेंट, फ्लाई ऐश ईंट सहित निर्माण सामग्री के थोक एवं खुदरा व्यवसाय का संचालन करते थे। ग्रामीण बताते हैं कि उनका स्वभाव अत्यंत सरल, मिलनसार और सहयोगी था। गांव में किसी भी सामाजिक कार्य में वे बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। यही कारण है कि उनके निधन की खबर से पूरा क्षेत्र गहरे शोक में डूब गया।
दो मासूम बच्चों के सिर से हमेशा के लिए उठ गया माता-पिता का साया
इस हादसे ने केवल दो जिंदगियां ही नहीं छीनीं, बल्कि दो मासूम बच्चों का पूरा संसार उजाड़ दिया। देवनारायण पटेल और सविता पटेल अपने पीछे एक पुत्र और एक पुत्री छोड़ गए हैं। पुत्री कॉलेज में अध्ययनरत है, जबकि पुत्र दसवीं कक्षा में पढ़ता है। हादसे के बाद से दोनों बच्चे लगातार भगवान से यही प्रार्थना कर रहे थे कि उनके माता-पिता किसी तरह सकुशल लौट आएं। हर गुजरते दिन के साथ उनकी उम्मीदें बनी रहीं, लेकिन बुधवार को जब कार से दोनों के शव निकाले गए तो बच्चों की दुनिया ही उजड़ गई। अब दोनों बच्चों के सिर से हमेशा के लिए माता-पिता का साया उठ गया। दादा-दादी, रिश्तेदार और पूरा परिवार इस असहनीय दुख से टूट चुका है।
रेस्क्यू अभियान देखने हजारों लोग पहुंचे
चार दिनों तक चले इस रेस्क्यू अभियान पर पूरे जिले की नजर बनी रही। बुधवार को जैसे ही विशेष गोताखोरों के नदी में उतरने की सूचना फैली, आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में लोग माधोपाली लात नाला पहुंच गए। घटनास्थल पर लोगों की इतनी भीड़ उमड़ पड़ी कि सड़क पर घंटों जाम की स्थिति बनी रही। पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। लोग घंटों तक नदी किनारे खड़े होकर रेस्क्यू अभियान देखते रहे और हर पल किसी चमत्कार की उम्मीद करते रहे।
लेकिन चार दिनों तक चली उम्मीद आखिरकार मातम में बदल गई। जब कार नदी से बाहर निकली तो उसके साथ एक परिवार की सारी खुशियां भी हमेशा के लिए बह चुकी थीं। पूरे बड़े घोठला गांव सहित आसपास के क्षेत्र में शोक का माहौल है। हर व्यक्ति की जुबान पर बस यही चर्चा है कि एक पल में हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए बिखर गया।




