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तबले की थाप से जीवंत होती थी रामायण की चौपाइयां, स्व. जगदीश प्रसाद महंत को वार्षिक श्राद्ध पर भावभीनी श्रद्धांजलि, पढ़े पूरी खबर,,,,,,

देवगांव में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उमड़ा जनसैलाब, कला साधना और सांस्कृतिक योगदान को किया गया याद

विशालपुर सारंगढ़ नईदुनिया दिलीप टंडन

सारंगढ़,बरमकेला। क्षेत्र के सुप्रसिद्ध तबला वादक एवं कला साधक स्वर्गीय जगदीश प्रसाद महंत की वार्षिक श्राद्ध तिथि पर उनके गृह ग्राम देवगांव में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सहित जनप्रतिनिधियों, कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सैकड़ों ग्रामीणों ने उपस्थित होकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा उनके कला और सांस्कृतिक योगदान को नमन किया।

क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान थे स्व. महंत

स्वर्गीय जगदीश प्रसाद महंत अपने समय के ख्यातिप्राप्त तबला वादकों में गिने जाते थे। वे जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पाण्डेय के निज सहायक एवं शिक्षक ध्रुवदास महंत तथा पत्रकार स्वतंत्र दास महंत के पिता थे। उनकी पहचान केवल देवगांव या आसपास के क्षेत्रों तक सीमित नहीं थी, बल्कि दूर-दराज के गांवों और धार्मिक आयोजनों में भी उनके तबला वादन की विशेष मांग रहती थी।

रामायण और भजन कार्यक्रमों की शान थे तबले के जादूगर

क्षेत्र में आयोजित नवधा रामायण, रामचरित मानस पाठ, भजन-कीर्तन एवं विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति विशेष महत्व रखती थी। कहा जाता था कि स्व. महंत के तबले की थाप किसी भी आयोजन में नई ऊर्जा और जीवंतता का संचार कर देती थी। उनकी लय, ताल और संगीत के प्रति समर्पण ने उन्हें कला जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई थी।

संगीत साधना को बताया प्रेरणादायी विरासत

श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय जगदीश प्रसाद महंत ने अपना संपूर्ण जीवन भारतीय संगीत, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से न केवल लोगों का मनोरंजन किया, बल्कि धार्मिक आयोजनों को गरिमा और भव्यता भी प्रदान की। उनका जीवन नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

संजय भूषण पाण्डेय ने अर्पित किए श्रद्धासुमन

जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पाण्डेय ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्व. जगदीश प्रसाद महंत का व्यक्तित्व अत्यंत सरल, सौम्य और प्रेरणादायी था। उनकी कला साधना, सामाजिक व्यवहार और सांस्कृतिक योगदान सदैव स्मरणीय रहेंगे। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाने में स्व. महंत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

भावुक माहौल में साझा किए संस्मरण

कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और ग्रामीणों ने स्व. महंत के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा उनके बताए आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। श्रद्धांजलि सभा के दौरान कई लोगों ने उनके साथ बिताए संस्मरण साझा किए, जिससे माहौल भावुक हो गया।

पीढ़ियों तक गूंजती रहेगी तबले की थाप

श्रद्धांजलि सभा के अंत में वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय जगदीश प्रसाद महंत का संगीत एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में दिया गया योगदान सदैव याद किया जाएगा। उनकी मधुर स्मृतियां और तबले की गूंज आज भी क्षेत्र के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में महसूस की जाती है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

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