सारंगढ़ में जनआक्रोश: चूना पत्थर खदान के खिलाफ बड़ा आंदोलन, पुलिस रोक न पाई भीड़; तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

ई-नीलामी पर बवाल: आबादी क्षेत्र में चूना पत्थर खदान के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों ग्रामीण वा जनप्रतिनिधि
विशालपुर नईदुनिया दिलीप टंडन
सारंगढ़। जिला मुख्यालय से लगे नगरीय क्षेत्र में प्रस्तावित चूना पत्थर खदान की ई-नीलामी के विरोध में बुधवार को बड़ा जनआंदोलन देखने को मिला। हजारों की संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि खेलभाठा मैदान से पैदल मार्च करते हुए कलेक्टर परिसर तक पहुंच गए। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस बल ने रोकने की कोशिश की, लेकिन जनसैलाब के आगे प्रयास नाकाम रहे। अंततः प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर खदान प्रस्ताव को तत्काल निरस्त करने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नगरपालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 01 कुटेला, 02 भोजपुर, 10 खैराहा, जुनाडीह समेत आसपास के गांव रांपागुला, दुर्गापाली, हरिहरपाली, चंदाई, खम्हारडीह, पचपेड़ी, भैंसदेहान, गाताडीह और सुलोनी जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में खदान संचालन का प्रस्ताव पूरी तरह अनुचित है। इन इलाकों के आसपास जिला अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, छात्रावास, न्यायालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जिला पंचायत भवन समेत कई महत्वपूर्ण शासकीय संस्थान स्थित हैं।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि खनन कार्य के दौरान होने वाली ब्लास्टिंग से ध्वनि, वायु प्रदूषण और कंपन का सीधा असर आमजन के स्वास्थ्य और मकानों पर पड़ेगा। साथ ही, मास्टर प्लान के तहत यह क्षेत्र आवासीय और मिश्रित उपयोग के लिए चिन्हित है, जहां खनन गतिविधि प्रतिबंधित है।

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि खदान शुरू करने से पहले पर्यावरणीय स्वीकृति, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र और जनसुनवाई जैसी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि प्रस्तावित खदान से राष्ट्रीय राजमार्ग और भारत माता परियोजना भी प्रभावित हो सकती है।

प्रदर्शन में जिला पंचायत सदस्य विनोद भारद्वाज, अनिका भारद्वाज, जनपद अध्यक्ष ममता राजीव सिंह, सांसद प्रतिनिधि, अरुण गुड्डु, कांग्रेस पूर्व जिला अध्यक्षअरुण मालाकार, सूरज तिवारी, संजय दुबे, रमेश खूंटे, वकील अश्विनी, पर्सद रामनाथ सिदार, अभिषेक शर्मा, शुभम बाजपेई सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही खदान की ई-नीलामी निरस्त नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।




