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साराडीह बैराज मुआवजा घोटाले का आरोप, सहखातेदार ने शासन को भेजा कानूनी नोटिस,पढ़े पूरी खबर,,,,,,,,

13.909 हेक्टेयर भूमि के बदले मिले 4.13 करोड़ मुआवजे में हिस्सेदारी से वंचित होने का दावा, कलेक्टर को धारा 80 सीपीसी के तहत नोटिस

विशालपुर नईदुनिया दिलीप टंडन

सारंगढ़। साराडीह बैराज निर्माण के दौरान अधिग्रहित भूमि के मुआवजा वितरण को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। ग्राम मानिकपुर निवासी गंगाराम गोंड ने अपने अधिवक्ता खेमराज सिंह के माध्यम से छत्तीसगढ़ शासन एवं जिला प्रशासन को धारा 80 सीपीसी के अंतर्गत पंजीकृत डाक से विधिक नोटिस भेजा है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि साराडीह बैराज के डुबान क्षेत्र में आने वाली पुश्तैनी संयुक्त भूमि का करोड़ों रुपये का मुआवजा कुछ लोगों को मिलीभगत कर दिला दिया गया, जबकि वास्तविक सहखातेदारों को उनके अधिकार से वंचित कर दिया गया।

नोटिस के अनुसार ग्राम जशपुर, पटवारी हल्का नंबर 06, राजस्व निरीक्षक मंडल हरदी तहसील सारंगढ़ स्थित भूमि खसरा नंबर 1/57, 1/219, 1/414, 1/539, 1/524, 608 एवं 610 सहित कुल 08 खसरों की लगभग 13.909 हेक्टेयर भूमि साराडीह बैराज के डुबान क्षेत्र में आई थी। यह भूमि गंगाराम के पूर्वज बुढवा के संयुक्त स्वामित्व की बताई गई है, जिसमें परिवार के अन्य उत्तराधिकारियों का भी समान अधिकार होना बताया गया है।

नोटिस में उल्लेख किया गया है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान सहखातेदारों के नाम रिकॉर्ड से हटाकर केवल कुछ लोगों — अक्ति, शक्ति, शिवकुमार, देवकुमार एवं विजय — के नाम दर्ज करा दिए गए। आरोप है कि यह कार्य हल्का पटवारी के साथ कथित मिलीभगत से किया गया। इसके बाद भू-अर्जन अधिकारी द्वारा पर्याप्त जांच किए बिना इन्हीं व्यक्तियों को भूमि स्वामी मानते हुए दिनांक 16 नवंबर 2020 को लगभग 4 करोड़ 13 लाख 44 हजार 750 रुपये का मुआवजा जारी कर दिया गया।

गंगाराम की ओर से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि भूमि स्वामित्व और उत्तराधिकार संबंधी तथ्यों की समुचित जांच नहीं की गई तथा गांव में विधिवत सूचना या इश्तहार भी जारी नहीं किया गया, जिसके कारण उन्हें भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी। अब जानकारी मिलने पर उन्होंने इसे अपने साथ आर्थिक अन्याय बताते हुए न्यायालय की शरण लेने की बात कही है।

नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि प्रशासन द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्यवाही नहीं की जाती, तो सक्षम न्यायालय में दावा प्रस्तुत कर मुआवजा राशि में हिस्सेदारी एवं क्षतिपूर्ति की मांग की जाएगी।

यह मामला सामने आने के बाद साराडीह बैराज भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया और मुआवजा वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाता है।

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