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मजदूरी की मजबूरी को कहा अलविदा, अब आइसक्रीम कारोबार से बनीं ‘लखपति दीदी’ राजकुमारी साहू, पढ़े पूरी खबर,,,,,,,

बिहान योजना ने बदली जिंदगी, स्वरोजगार से बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा

विशालपुर सारंगढ़ नईदुनिया दिलीप टंडन

सारंगढ़-बिलाईगढ़। कभी दो वक्त की रोटी और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए दूसरे राज्यों में मजदूरी करने को मजबूर रहने वाली सरसीवा विकासखंड के ग्राम टाटा बिलासपुर की राजकुमारी साहू आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई हैं। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के सहयोग से उन्होंने न केवल अपना सफल आइसक्रीम एवं कुल्फी व्यवसाय खड़ा किया, बल्कि अपने गांव की महिलाओं को भी स्वावलंबन की राह दिखाते हुए एक नई पहचान दिलाई है।

आज राजकुमारी साहू का नाम पूरे क्षेत्र में एक सफल महिला उद्यमी के रूप में जाना जाता है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि सही मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं का सहयोग और मजबूत इच्छाशक्ति मिल जाए तो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी अपनी मेहनत के दम पर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं।

मजदूरी से शुरू हुआ संघर्ष का सफर

राजकुमारी साहू का जीवन अभावों से भरा रहा। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। गांव में रोजगार नहीं मिलने से उन्हें अपने परिवार के साथ दूसरे राज्यों में पलायन कर मजदूरी करनी पड़ी। कठिन परिस्थितियों में मजदूरी करते हुए उनके मन में हमेशा यह इच्छा रहती थी कि एक दिन अपने गांव में रहकर सम्मानपूर्वक रोजगार कर सकें और अपने बच्चों का बेहतर भविष्य बना सकें।

बिहान योजना बनी उम्मीद की नई किरण

गांव लौटने के बाद राजकुमारी साहू को छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से स्वरोजगार शुरू करने का निर्णय लिया। शुरुआत आसान नहीं थी। गांव की महिलाओं को समूह से जोड़ना और उन्हें आर्थिक गतिविधियों के लिए तैयार करना चुनौतीपूर्ण था।

लगातार प्रयासों के बाद उन्होंने 10 महिलाओं को साथ लेकर ‘जय मां संतोषी महिला स्व-सहायता समूह’ का गठन किया। समूह की महिलाओं ने हर महीने 100-100 रुपये की बचत शुरू की, जिसने आगे चलकर बड़े बदलाव की नींव रखी।

सीखे हुए हुनर को बनाया रोजगार

दूसरे राज्यों में मजदूरी के दौरान राजकुमारी साहू ने आइसक्रीम और कुल्फी बनाने की प्रक्रिया को ध्यान से सीखा था। गांव लौटने के बाद उन्होंने उसी हुनर को रोजगार का माध्यम बनाने का निर्णय लिया।

बिहान योजना के माध्यम से उनके समूह को 1 लाख 50 हजार रुपये का बैंक ऋण तथा 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश राशि उपलब्ध कराई गई। इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने आइसक्रीम, मटका कुल्फी और बादाम शेक सहित विभिन्न उत्पादों का निर्माण शुरू किया।

शुद्ध गुणवत्ता और बेहतर स्वाद के कारण उनके उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी और बिलाईगढ़ सहित आसपास के बाजारों में उनकी पहचान बनने लगी।

आज लाखों की आय का सफल व्यवसाय

राजकुमारी साहू का छोटा सा घरेलू व्यवसाय आज सफल उद्यम का रूप ले चुका है। उनका समूह प्रतिवर्ष लगभग 1 से 3 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहा है। जो महिला कभी मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करती थीं, आज वे आत्मनिर्भर होकर ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।

दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

राजकुमारी साहू अब केवल सफल व्यवसायी ही नहीं बल्कि अपने क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी हैं। वे स्वयं व्यवसाय का संचालन करने के साथ-साथ समूह की अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनके प्रयासों से कई महिलाएं भी आर्थिक रूप से मजबूत बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

सरकारी योजनाओं से बदली तस्वीर

राजकुमारी साहू की सफलता इस बात का उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग और दृढ़ संकल्प किसी भी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकता है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से उन्हें मिला आर्थिक सहयोग और प्रशिक्षण आज उनके परिवार के साथ-साथ पूरे गांव के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

आज राजकुमारी साहू की कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए यह संदेश देती है कि मेहनत, आत्मविश्वास और सही अवसर मिलने पर कोई भी महिला आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज की दिशा बदल सकती है।

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