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साइबर जागृति अभियान में 97 स्थानों पर पहुंची पुलिस, 8,778 लोगों को किया जागरूक, पढ़े पूरी खबर,,,,,,,

डिजिटल अरेस्ट, फर्जी ट्रेडिंग ऐप और एआई आधारित ठगी से बचने दी जानकारी, साइबर ठगी होने पर 1930 पर तत्काल कॉल की अपील

विशालपुर सारंगढ़ नईदुनिया दिलीप टंडन

सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ पुलिस के मार्गदर्शन में जिले में चलाए जा रहे ‘साइबर जागृति अभियान’ के चौथे चरण के तहत पुलिस द्वारा लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान के तहत जिले के सभी थाना एवं चौकी क्षेत्रों के विभिन्न गांवों, स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर पहुंचकर लोगों को डिजिटल धोखाधड़ी एवं साइबर ठगी से बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिले के करीब 97 स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें लगभग 8,778 लोगों को साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी दी गई।

यह अभियान 6 सितंबर से 12 सितंबर 2026 तक चलेगा। इसके बाद पांचवें चरण की शुरुआत होगी और अभियान का समापन 2 अक्टूबर को किया जाएगा। चौथे चरण का मुख्य विषय ‘स्मार्टफोन प्राइवेसी और सुरक्षित ब्राउजिंग’ रखा गया है। पुलिस टीमों ने लोगों को स्मार्टफोन के सुरक्षित उपयोग, व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और इंटरनेट पर सावधानी बरतने के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि वर्तमान समय में डिजिटल उपकरण लोगों के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। इसके साथ ही साइबर अपराध के मामले भी लगातार नए स्वरूप में सामने आ रहे हैं। साइबर ठग लोगों को डराने, लालच देने और उनकी व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने के बाद आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। पुलिस ने विशेष रूप से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर होने वाली ठगी से सावधान रहने की अपील की।

पुलिस टीमों ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से स्वयं को पुलिस, सीबीआई, कस्टम अथवा किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर डराता-धमकाता है और पैसे की मांग करता है तो ऐसे कॉल से घबराने की जरूरत नहीं है। ठग अक्सर गिरफ्तारी या किसी अपराध में फंसने का भय दिखाकर लोगों से रकम ट्रांसफर करवाते हैं। नागरिकों से कहा गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर न करें और व्यक्तिगत अथवा बैंकिंग जानकारी साझा न करें।

अभियान के दौरान शेयर बाजार और आईपीओ में निवेश के नाम पर होने वाली ठगी को लेकर भी लोगों को सतर्क किया गया। पुलिस ने बताया कि साइबर ठग सोशल मीडिया विज्ञापनों, व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से लोगों को फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ते हैं। कम समय में भारी मुनाफा कमाने का लालच देकर उनसे रकम निवेश कराई जाती है और बाद में राशि निकालने के नाम पर अलग-अलग शुल्क मांगे जाते हैं। नागरिकों से अपील की गई कि अनजान लिंक, सोशल मीडिया विज्ञापन या किसी व्यक्ति के कहने पर फर्जी ट्रेडिंग एवं इन्वेस्टमेंट ऐप डाउनलोड न करें तथा निवेश से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता और वैधता की जांच जरूर करें।

पुलिस ने एआई के माध्यम से होने वाली साइबर ठगी के नए तरीकों के बारे में भी लोगों को जागरूक किया। ठग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से आवाज की नकल करने, परिचित व्यक्ति जैसी आवाज में बात करने अथवा वीडियो कॉल के माध्यम से पहचान का भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। इसलिए किसी परिचित के नाम से अचानक पैसे की मांग होने पर केवल आवाज या वीडियो देखकर भरोसा न करने और दूसरे माध्यम से संबंधित व्यक्ति से संपर्क कर पुष्टि करने की सलाह दी गई।

जागरूकता कार्यक्रमों में सार्वजनिक स्थानों पर मिलने वाले अनजान वाई-फाई नेटवर्क का इस्तेमाल करते समय भी सावधानी बरतने को कहा गया। विशेष रूप से इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई अथवा अन्य वित्तीय लेनदेन के लिए सार्वजनिक या असुरक्षित वाई-फाई का उपयोग नहीं करने की सलाह दी गई। साथ ही AnyDesk, TeamViewer जैसे रिमोट एक्सेस या स्क्रीन शेयरिंग ऐप किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर डाउनलोड नहीं करने को कहा गया।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि वे अपना ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड, एटीएम या बैंक संबंधी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। लुभावने ऑफर, इनाम, नौकरी, निवेश अथवा अन्य लालच वाले अज्ञात लिंक पर क्लिक करने से भी बचें। मोबाइल में अनजान एप्लीकेशन डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच जरूर करें।

यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो घटना के बाद देरी न करते हुए तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही नजदीकी थाना पुलिस को भी इसकी सूचना दें। पुलिस के अनुसार ठगी की जानकारी जितनी जल्दी मिलती है, उतनी ही जल्दी संबंधित बैंकिंग लेनदेन पर रोक लगाने और ठगी गई राशि को होल्ड कराने का प्रयास किया जा सकता है।

साइबर जागृति अभियान के माध्यम से पुलिस ने जिलेवासियों से अपील की है कि स्वयं साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहें और अपने परिवार, परिचितों, विद्यार्थियों तथा आसपास के लोगों को भी जागरूक करें। सतर्कता, सावधानी और समय पर शिकायत ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।

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