प्रभारी मंत्री ने जिला अस्पताल समेत विभिन्न विकास कार्यों का किया लोकार्पण, लोचन प्रसाद पाण्डेय महाविद्यालय में अतिरिक्त कक्ष का किया उद्घाटन, पढ़े पूरी खबर,,,,,,

विचार ही सबसे बड़ी ताकत, जैसा सोचेंगे वैसा ही बनेंगे : टंकराम वर्मा
विशालपुर सारंगढ़ नईदुनिया दिलीप टंडन
सारंगढ़। जिला प्रभारी मंत्री एवं राजस्व, आपदा प्रबंधन तथा उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने सोमवार को सारंगढ़ जिले के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होकर विकास कार्यों का लोकार्पण किया। उन्होंने पशुधन विभाग के अतिरिक्त कक्ष, जिला चिकित्सालय के अतिरिक्त कक्ष, नवीन भर्ती कक्ष एवं ऑफिसर्स मेस का उद्घाटन किया। इसके बाद शासकीय लोचन प्रसाद पाण्डेय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सारंगढ़ में अतिरिक्त कक्ष के लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। महाविद्यालय परिवार ने जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष मनोज जायसवाल एवं प्राचार्य डॉ. लोकेश्वर पटेल के नेतृत्व में उनका स्वागत किया।

समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि मनुष्य जैसा विचार करता है, वैसा ही बनता है। किसी भी कार्य को करने से पहले मनुष्य के मन में विचार आता है और वही विचार आगे चलकर उसके कार्य और जीवन की दिशा तय करता है। उन्होंने कहा कि एक विचार व्यक्ति के जीवन में आग लगा सकता है और एक विचार पूरी जिंदगी बदल सकता है। इसलिए जीवन में हमेशा सकारात्मक विचार रखना चाहिए और अच्छी संगत का चुनाव करना चाहिए।

मंत्री ने विचारों की शक्ति को समझाने के लिए कुम्हार और मिट्टी की कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि एक कुम्हार मिट्टी से चिलम बना रहा था। उसकी पत्नी ने पूछा कि चिलम क्यों बना रहे हो। कुम्हार ने कहा कि फैशन का जमाना है, चिलम खूब बिकेगी। पत्नी ने गर्मी का मौसम बताते हुए सुराही बनाने की सलाह दी। कुम्हार ने अपना विचार बदल लिया और उसी मिट्टी से सुराही बनाने लगा।

मंत्री ने कहानी के माध्यम से बताया कि मिट्टी ने मानो कुम्हार से कहा कि तुम्हारा तो केवल विचार बदला है, लेकिन मेरा तो पूरा जीवन ही बदल गया। यदि चिलम बनती तो उसमें आग डाली जाती और वह स्वयं भी जलती तथा दूसरों को भी जलाती। अब सुराही बन गई हूं, तो मेरे अंदर शीतल जल भरा जाएगा। मैं स्वयं भी शीतल रहूंगी और दूसरों को भी शीतलता दूंगी। उन्होंने कहा कि जब एक मिट्टी का जीवन एक विचार से बदल सकता है तो मनुष्य का जीवन तो विचारों से पूरी तरह बदल सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में हमेशा अच्छी संगत और अच्छे विचारों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि अच्छी संगत करेंगे तो अच्छे बनेंगे और बुरी संगत का परिणाम भी वैसा ही होगा। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि महाभारत में दुर्योधन ने शकुनि की संगत की, जिसका परिणाम कौरव वंश के विनाश के रूप में सामने आया। इसी तरह रामायण में कैकेयी ने मंथरा की संगत में आकर ऐसा निर्णय लिया, जिसके कारण भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास हुआ। इसलिए विद्यार्थियों को अपने जीवन में संगत का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
प्राचार्य डॉ. लोकेश्वर पटेल ने स्वागत उद्बोधन में महाविद्यालय की उपलब्धियों और आवश्यकताओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय की स्थापना आज ही के दिन वर्ष 1983 में हुई थी।

महाविद्यालय अपनी गौरवशाली यात्रा के 43 वर्ष पूर्ण कर रहा है। इन वर्षों में संस्थान ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में उच्च शिक्षा के विकास और विद्यार्थियों के सर्वांगीण निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों में स्नातक पाठ्यक्रमों के साथ 12 विषयों में स्नातकोत्तर तथा पीजीडीसीए पाठ्यक्रम संचालित हैं। वर्तमान में करीब 2400 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इस सत्र में बीए, बीएससी एवं बीकॉम प्रथम सेमेस्टर में अब तक 606 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप अध्ययन-अध्यापन कार्य संचालित किया जा रहा है।

महाविद्यालय परिसर में पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, बिलासपुर का अध्ययन केंद्र भी संचालित है। शिक्षण कार्य में आईसीटी का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए एनसीसी, एनएसएस, रेडक्रॉस, रेड रिबन क्लब, इको क्लब एवं साइंस क्लब जैसी गतिविधियां भी सक्रिय हैं। महाविद्यालय में विशाल खेल मैदान और समृद्ध ग्रंथालय की सुविधा उपलब्ध है।

प्राचार्य ने बताया कि महाविद्यालय के प्राध्यापकों द्वारा प्रत्येक शुक्रवार एवं शनिवार को विद्यार्थियों के लिए निशुल्क सीजीपीएससी कोचिंग भी दी जा रही है। महाविद्यालय नैक से मूल्यांकित है तथा गत अकादमिक वर्ष से वार्षिक पत्रिका ‘सारंग भूमि’ का प्रकाशन भी शुरू किया गया है।
प्राचार्य डॉ. पटेल ने कहा कि महाविद्यालय अब विकास के अगले चरण की ओर बढ़ना चाहता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पिछले वर्ष सारंगढ़ आगमन के दौरान महाविद्यालय के लिए स्नातकोत्तर भवन की घोषणा की थी, लेकिन प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिलने के कारण अब तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया है। उन्होंने प्रभारी मंत्री से भवन के लिए प्रशासनिक स्वीकृति दिलाने की दिशा में आवश्यक पहल करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की आवश्यकताओं को देखते हुए महाविद्यालय में विभिन्न विषयों में प्राध्यापकों के अतिरिक्त पदों की आवश्यकता है। पुराने सेटअप के कारण वर्तमान में पर्याप्त पद स्वीकृत नहीं हैं। उन्होंने मंत्री से नए सेटअप के अनुरूप नवीन पदों की स्वीकृति प्रदान कराने की मांग की।
मंत्री टंकराम वर्मा ने महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों और उपलब्धियों की सराहना करते हुए इसे जिले का अग्रणी महाविद्यालय बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक सोच को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी, विद्यार्थी एवं जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।




