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सारंगढ़ में कांग्रेस की प्रेस वार्ता, राम मंदिर ट्रस्ट की जवाबदेही तय करने की मांग, पढ़े पूरी खबर,,,

सारंगढ़। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित चंदा और वित्तीय अनियमितता के मुद्दे को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी सारंगढ़-बिलाईगढ़ ने रविवार को जिला कांग्रेस कार्यालय सारंगढ़ में प्रेस वार्ता आयोजित कर केंद्र सरकार एवं ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर सवाल खड़े किए। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कार्यक्रम प्रभारी एवं रायगढ़ के पूर्व जिलाध्यक्ष अनिल शुक्ला ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय तथा ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाना इस बात का संकेत है कि मामला केवल प्रशासनिक त्रुटि का नहीं बल्कि गंभीर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हो सकता है।

अनिल शुक्ला ने कहा कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी द्वारा सार्वजनिक रूप से दिए गए बयानों के बाद कई नए सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की वित्तीय निगरानी, पारदर्शिता और संपत्तियों की सुरक्षा की सर्वोच्च जिम्मेदारी शीर्ष पदाधिकारियों की होती है, ऐसे में जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि ट्रस्ट के विशिष्ट आमंत्रित सदस्य गोपाल राव (गोपाल नगरकोट) की स्थिति और उन्हें हटाए जाने को लेकर भी विरोधाभासी जानकारियां सामने आई हैं।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को ट्रस्ट का नया महासचिव बनाए जाने के बावजूद पूरे मामले को दबाने और लीपापोती करने के आरोप सार्वजनिक रूप से लगाए जा रहे हैं। उनका कहना था कि ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे और शीर्ष स्तर की नियुक्तियों में प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका रही है, इसलिए केंद्र सरकार इस मामले में अपनी जवाबदेही से अलग नहीं हो सकती।

प्रेस वार्ता में यह भी दावा किया गया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) राम मंदिर से जुड़े बड़े आयोजनों के खर्चों की भी जांच कर रही है। कांग्रेस नेताओं के अनुसार 22 जनवरी 2024 को आयोजित प्राण-प्रतिष्ठा समारोह पर लगभग 113 करोड़ रुपये तथा 25 नवंबर 2025 के ध्वजारोहण कार्यक्रम पर करीब 10.12 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इन आयोजनों के खर्च, चंदा राशि, नकद चढ़ावे और लेखा-जोखा को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि फर्जी रसीदों, नकद चढ़ावे और कथित वित्तीय हेराफेरी से जुड़े कई आरोप सामने आने के बावजूद अब तक केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है, जबकि शीर्ष पदाधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई। नेताओं ने कहा कि यदि ट्रस्ट कटघरे में है तो केवल निचले स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।

अनिल शुक्ला ने कहा कि देश यह जानना चाहता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे मामले पर मौन क्यों हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोविंद देव गिरी, गोपाल राव तथा ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच सकते हैं। कांग्रेस ने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

प्रेस वार्ता में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ताराचंद देवांगन, संजय दुबे, सूरज तिवारी, अरुण मालाकार, नितीश बंजारे, उमेश केशरवानी, रवीन्द्र नंदे, राधेश्याम जायसवाल, रामनाथ सिदार, रमेश खुंटे, राकेश पटेल, हेमंत, मितेंद्र यादव, राजू यादव सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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