साराडीह में 117वां अखिल भारतीय रामनामी बड़ा भजन मेला शुरू, पढ़े पूरी खबर,,,

तीन दिवसीय आयोजन में उमड़े जनप्रतिनिधि, भवन निर्माण के लिए 10-10 लाख की मांग
साराडीह में झूले, मौत का कुआं, टॉकीज, खिलौने और खई-खजाने की दुकानों से सजा मेला, तीन दिन तक रहेगा आकर्षण
सारंगढ़-बिलाईगढ़।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम साराडीह में परंपरागत अखिल भारतीय रामनामी बड़ा भजन मेला का शुभारंभ मंगलवार से हुआ। यह ऐतिहासिक मेला पिछले 117 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहा है। तीन दिवसीय यह भजन मेला 30 दिसंबर से 1 जनवरी तक चलेगा, जिसमें दूर-दराज से रामनामी समाज के श्रद्धालु एवं भजन मंडलियां शामिल हो रही हैं।

मेले के शुभारंभ अवसर पर राम-राम की पूजा-अर्चना के बाद अतिथियों का स्वागत भजन अध्यक्ष वीरेन्द्र टंडन साइत एवं ग्रामवासियों द्वारा फूलमालाओं से किया गया। इस दौरान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामनामी महासभा के अध्यक्ष कौशल ने कोसिर क्षेत्र में राम-राम के भक्तों के लिए भवन निर्माण हेतु प्रत्येक 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि की मांग रखी।

इस पर विधायक उत्तरी गणपत जांगड़े ने सभी को राम-राम कहते हुए कहा कि वर्तमान में सरकार में नहीं होने के कारण तत्काल बजट उपलब्ध नहीं है, लेकिन बजट मिलते ही इस मांग को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही उन्होंने सत्ताधारी भाजपा सरकार से भी इस मांग को पूरा करने का आग्रह किया।


जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पाण्डेय ने रामनामी समाज की मांग को जायज बताते हुए इसे पूरा करने का आश्वासन दिया।
इस पावन अवसर पर जिला पंचायत जिला अध्यक्ष संजय भूषण पांडे सारंगढ़ विधायक उत्तरी गणपत जांगड़े, सांसद प्रतिनिधि अरुण गुड्ड, पूर्व विधायक सुश्री कामदा जोल्हे, पूर्व विधायक श्रीमती केराबाई मनहर, जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि राजीव सिंह ठाकुर पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष अरुण मालाकार, विधायक प्रतिनिधि श्री प्राण लहरे, श्याम सुंदर रात्रे, अजय बंजारे, सरपंच श्रीमती रत्नज्योति देवेंद्र रात्रे, रामनामी महासभा अध्यक्ष श्री कौशल, सतनामी विकास परिषद के पूर्व अध्यक्ष देव कोशले सहित जनप्रतिनिधिगण एवं रामनामी समाज के अनेक गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे
।इस
तीन दिनों तक चलने वाले इस भजन मेले में रामनाम की गूंज और भक्ति गीतों से क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
भजन-कीर्तन के साथ-साथ मेले में मनोरंजन और बाजार की भी रौनक देखने को मिल रही है। मेले में बच्चों के लिए झूले, रोमांच से भरपूर मौत का कुआं, टॉकीज, तरह-तरह के खिलौनों की दुकानें, खई-खजाना सहित रोजमर्रा और पारंपरिक वस्तुओं की कई दुकानें पहुंची हैं। इससे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक मेले का भरपूर आनंद ले रहे हैं।





