कानन पेंडारी में गूंजा कविता का स्वर, तीन पुस्तकों का हुआ विमोचन, पढ़े पूरी खबर,,,,,

छत्तीसगढ़ कलमकार मंच की काव्य-गोष्ठी में 57 साहित्यकारों का सम्मान, मंच के बैनर तले विमोचित पुस्तकों की संख्या पहुंची 87
विशालपुर नईदुनिया दिलीप टंडन 🖊️🖊️🖊️🖊️
सारंगढ़,बिलासपुर। कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क बिलासपुर में 20 सितंबर को राष्ट्रीय सेवा रत्न सम्मान एवं राष्ट्रीय प्रतिष्ठा पुरस्कार प्राप्त समिति छत्तीसगढ़ कलमकार मंच, मस्तूरी के तत्वावधान में पुस्तक विमोचन, काव्य-गोष्ठी एवं साहित्यकार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। प्राकृतिक वातावरण के बीच आयोजित इस साहित्यिक आयोजन में बिलासपुर सहित बेमेतरा, रायपुर, मुंगेली, जांजगीर, कोरबा, रायगढ़, बलौदाबाजार सहित विभिन्न जिलों से साहित्यकार और कलमकार शामिल हुए। कार्यक्रम में तीन पुस्तकों का विमोचन किया गया, वहीं 57 साहित्यकारों को साहित्य गौरव सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत कलमकारों की टीम द्वारा कानन पेंडारी जंगल सफारी के भ्रमण से हुई। इसके बाद प्राकृतिक सुषमा से परिपूर्ण कानन पेंडारी परिसर में शेड के नीचे सुसज्जित स्थान पर काव्य-गोष्ठी, पुस्तक विमोचन एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन नवागढ़-बेमेतरा से पहुंचे विख्यात गायक-कवि एवं छत्तीसगढ़ कलमकार मंच के उपाध्यक्ष जुगेश बंजारे धीरज ने किया। उन्होंने अपनी प्रभावी उद्घोषणा से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। इस दौरान शेर की दहाड़ के बीच विभिन्न जिलों से पहुंचे कलमकारों का पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया गया।

इसके बाद उपस्थित सभी कलमकारों एवं दर्शकों को भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन कराया गया। संविधान की प्रस्तावना के वाचन के साथ साहित्य, समाज और राष्ट्र के प्रति रचनाकारों की जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया।
तीन पुस्तकों का हुआ विमोचन

कार्यक्रम में करतल ध्वनि के बीच तीन पुस्तकों का विमोचन किया गया। सर्वप्रथम छत्तीसगढ़ कलमकार मंच के तत्वावधान में प्रकाशित डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति द्वारा संपादित एवं श्री सुरजीत द्वारा संकलित पुस्तक “धरोहर” राष्ट्रीय साझा संकलन का विमोचन हुआ। 231 पृष्ठों की इस पुस्तक में 56 कलमकारों के जीवन परिचय के साथ उनकी श्रेष्ठ रचनाओं को स्थान दिया गया है।
इसके बाद डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति की दो कृतियों “बचपन” बाल कविता-गीत संग्रह तथा “पथ की पहचान” काव्य संग्रह का विमोचन किया गया। आयोजकों के अनुसार ये दोनों कृतियां डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति की क्रमशः 82वीं और 83वीं कृति हैं।
87 पुस्तकों के विमोचन का दावा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ कलमकार मंच के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति ने उपस्थित साहित्यकारों का अभिनंदन किया और आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने साझा संकलन में शामिल सभी कलमकारों को बधाई देते हुए कहा कि मंच के तत्वावधान में एक ही आयोजन में तीन पुस्तकों का विमोचन होना साहित्य जगत के लिए खुशी का विषय है।
उन्होंने बताया कि इन तीन पुस्तकों को मिलाकर छत्तीसगढ़ कलमकार मंच के बैनर तले विमोचित पुस्तकों की संख्या 87 हो गई है। उनके अनुसार सवा चार वर्ष की अवधि में 87 पुस्तकों का विमोचन मंच की साहित्यिक गतिविधियों की निरंतरता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि मंच द्वारा अब तक 1601 कलमकारों को सम्मानित किया जा चुका है।
57 साहित्यकारों को मिला साहित्य गौरव सम्मान
काव्य-गोष्ठी एवं पुस्तक विमोचन के साथ साहित्यकार सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। इस अवसर पर 57 साहित्यकारों को “साहित्य गौरव सम्मान 2026” से सम्मानित किया गया। सम्मानित साहित्यकारों को सम्मानपत्र, मेडल एवं पुस्तक प्रदान की गई। मंच के पदाधिकारियों और अतिथियों ने साहित्यकारों को उनकी रचनात्मक यात्रा के लिए शुभकामनाएं देते हुए साहित्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने का आह्वान किया।
डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति ने बताया कि इस आयोजन के बाद मंच द्वारा सम्मानित किए गए कलमकारों की संख्या 1601 हो गई है। उन्होंने इसे मंच की निरंतर साहित्यिक गतिविधियों की उपलब्धि बताया। यह आयोजन मंच का 28वां आयोजन रहा।
कवियों की रचनाओं से गूंजता रहा कानन पेंडारी
कार्यक्रम के अगले चरण में विभिन्न जिलों से पहुंचे कवियों ने अपनी मनभावन रचनाओं की प्रस्तुति दी। कवियों की रचनाओं पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उत्साहवर्धन किया। कानन पेंडारी में भ्रमण के लिए पहुंचे लोग भी काव्य पाठ की आवाज सुनकर कुछ देर के लिए कार्यक्रम स्थल पर रुकते रहे और कविताओं का आनंद लिया।
काव्य-गोष्ठी में साहित्य, समाज, प्रकृति, राष्ट्रप्रेम और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी रचनाओं की प्रस्तुति हुई। प्राकृतिक वातावरण के बीच कविता और साहित्य की इस महफिल ने आयोजन को अलग ही स्वरूप प्रदान किया।
अतिथियों ने साहित्यकारों का बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति के मुख्य आतिथ्य, डॉ. गोवर्धन साहेब की अध्यक्षता तथा डॉ. गुलाबचंद कुसुम, प्राचार्य खरौद कॉलेज, डॉ. प्यारेलाल आदिले, प्राचार्य कटघोरा कॉलेज एवं शिवदत्त बंजारे, सामाजिक कार्यकर्ता के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न हुआ। अतिथियों ने साहित्यकारों को प्रेरक उद्बोधन देते हुए लेखन के माध्यम से समाज को दिशा देने और नई पीढ़ी में साहित्य के प्रति रुचि विकसित करने की बात कही।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ कलमकार मंच के उपाध्यक्ष जुगेश बंजारे धीरज, कोषाध्यक्ष बेदराम जाटवर वेदांज, सचिव नवीन कुमार कुर्रे, विजय कुमार कोशले सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर, राजेन्द्र कश्यप पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, चतुर सिंह चंचल, लेखक सुरजीत, महेन्द्र खूँटे माही रायपुर, मनोज समदिल, बुंदराम जांगड़े, कार्तिक पुराण घृतलहरे, विनीता दिनेश गेंदले, नीतेश्वरी सूर्यवंशी, ऐन प्रसाद घृतलहरे, मोहन दास सत्ऋषु, डॉ. दानिया प्रसाद, रोहित गुमा, दिनेश गेंदले सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं बाल-वृंद उपस्थित रहे।
अंत में सभी साहित्यकारों को मेडल, सम्मानपत्र एवं पुस्तकें प्रदान की गईं। कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी संचालन जुगेश बंजारे धीरज ने किया। आभार प्रदर्शन के साथ समारोह के समापन की घोषणा की गई।




