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मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा में जिला अस्पताल सारंगढ़ का कीर्तिमान, 543 सुरक्षित प्रसव कराए, पढ़े पूरी खबर,,,,,,

जून से शुरू हुई सिजेरियन सुविधा से गंभीर गर्भवती महिलाओं को मिली बड़ी राहत, कलेक्टर ने स्वास्थ्य टीम की सराहना

विशालपुर सारंगढ़ नईदुनिया दिलीप टंडन

सारंगढ़ | जिला चिकित्सालय सारंगढ़ में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि सामने आई है। जनवरी 2026 से अब तक जिला चिकित्सालय में कुल 543 सफल एवं सुरक्षित प्रसव कराए जा चुके हैं। इनमें 502 सामान्य प्रसव और जून 2026 से शुरू की गई उन्नत सिजेरियन प्रसव सुविधा के तहत 41 जटिल सिजेरियन ऑपरेशन शामिल हैं। जिला अस्पताल में सामान्य के साथ अब सिजेरियन प्रसव की सुविधा भी उपलब्ध होने से क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को बड़ी राहत मिली है। गंभीर स्थिति में पहले जिन महिलाओं को बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर करना पड़ता था, उन्हें अब सारंगढ़ में ही आवश्यक उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सुविधा मिल रही है।

कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के मार्गदर्शन और सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल के निरंतर प्रयासों से जिला चिकित्सालय में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार बेहतर किया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के साथ गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच, विशेषज्ञ परामर्श और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि जनवरी से अब तक 543 प्रसव सुरक्षित तरीके से कराए जा चुके हैं।

जिला चिकित्सालय में जून 2026 से सिजेरियन प्रसव सुविधा शुरू की गई। इसके बाद जटिल गर्भावस्था के मामलों में स्थानीय स्तर पर ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध हो गई है। अब तक 41 जटिल सिजेरियन ऑपरेशन किए जा चुके हैं। इससे उन महिलाओं और उनके परिजनों को विशेष राहत मिली है, जिन्हें पहले गंभीर स्थिति में रायगढ़, बिलासपुर या अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में उपचार के लिए जाना पड़ता था। स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलने से समय और आर्थिक खर्च दोनों में कमी आने के साथ आपात स्थिति में उपचार मिलने की संभावना भी बढ़ी है।

इस उपलब्धि में जिला चिकित्सालय की पूरी मेडिकल टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आरएमओ डॉ. नरेंद्र कुमार रात्रे के समन्वय में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रानू मनहर, एनेस्थेटिस्ट डॉ. कुन्ती नायक, जनरल सर्जन डॉ. राकेश साहू सहित स्टाफ नर्स राखी घोष, फरहा जांगड़े और उमा पटेल तथा जिला चिकित्सालय के समस्त अधिकारी-कर्मचारियों ने समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। प्रसव से पहले गर्भवती महिलाओं की जांच, जोखिम की पहचान, आवश्यक उपचार और प्रसव के दौरान सतत निगरानी से सुरक्षित प्रसव कराने में मदद मिल रही है।

कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने जिला चिकित्सालय की इस उपलब्धि पर पूरी स्वास्थ्य टीम की सराहना की है। उन्होंने कहा कि 543 सुरक्षित प्रसव का आंकड़ा अस्पताल की कार्यकुशलता, चिकित्सकीय टीम की प्रतिबद्धता और आम लोगों के बढ़ते भरोसे का प्रमाण है। जिला प्रशासन का उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। जिला चिकित्सालय की टीम इस दिशा में बेहतर कार्य कर रही है और भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के प्रयास जारी रहेंगे।

सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल ने जिले की गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से अपील की है कि वे सुरक्षित प्रसव के लिए जिला चिकित्सालय की निःशुल्क एवं आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। प्रसव के दौरान प्रशिक्षित चिकित्सकीय टीम की निगरानी में संस्थागत प्रसव कराने से मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। जिला चिकित्सालय प्रबंधन आमजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है।

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