कलेक्टर’ संजय कन्नौजे: सादगी से जीता भरोसा, सक्रियता से बदली सारंगढ़-बिलाईगढ़ की तस्वीर, पढ़े पूरी खबर,,,,,,

जब कलेक्टर खुद सड़कों पर उतरे, बदलने लगे जिले के हालात
सारंगढ़-नईदुनिया, दिलीप टंडन
छत्तीसगढ़ के नवगठित जिलों में शामिल सारंगढ़-बिलाईगढ़ इन दिनों एक नई प्रशासनिक कार्यसंस्कृति के लिए चर्चा में है। इसकी वजह हैं जिले के कलेक्टर श्री संजय कन्नौजे, जिन्होंने अपने सहज व्यवहार, जमीन से जुड़े प्रशासन और विकासोन्मुख सोच से जनता के दिलों में खास जगह बनाई है। सादगी और सख्ती का यह संतुलन अब जिले की पहचान बनता जा रहा है।
वीआईपी कल्चर को ठेंगा, आमजन से सीधा संवाद
सारंगढ़ की जनता तब चौंक जाती है, जब वह जिले के सर्वोच्च अधिकारी को बिना किसी तामझाम और प्रोटोकॉल के सड़कों पर चलता देखती है। न सुरक्षा घेरा, न दिखावा—कलेक्टर कन्नौजे का यह अंदाज प्रशासन और जनता के बीच की दीवार को तोड़ता नजर आता है।
पिता पहले, अधिकारी बाद में
कलेक्टर श्री कन्नौजे को अक्सर अपने बच्चों को स्वयं स्कूल छोड़ते देखा जाता है। एक जिम्मेदार पिता के रूप में उनकी यह भूमिका सोशल मीडिया से लेकर आम चौक-चौराहों तक चर्चा में रहती है। जनता कहती है—“ऐसे अफसर बहुत कम देखने को मिलते हैं।”
बाजार में कलेक्टर, वो भी आम आदमी की तरह
दुकानों में खुद जाकर खरीदारी करना, पैदल बाजार में घूमना और आम लोगों से सहज बातचीत—यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। एक IAS अधिकारी को इस तरह करीब से देखना लोगों के लिए सुखद आश्चर्य है।
विकास का ‘सारंगढ़ मॉडल’
सादगी के साथ-साथ कलेक्टर कन्नौजे की प्रशासनिक पकड़ भी उतनी ही मजबूत है। उन्होंने वर्षों से लंबित समस्याओं पर सीधे हाथ डालते हुए जिले के विकास को नई रफ्तार दी है।
सड़क और कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार
कलेक्टर की पहल से जिले की प्रमुख सड़कों और संपर्क मार्गों का तेजी से नवीनीकरण हुआ। जर्जर रास्तों की जगह अब सुगम और सुरक्षित आवागमन ने ले ली है।
बिजली व्यवस्था को मिली नई ताकत
ग्रामीण अंचलों में बिजली अधोसंरचना को मजबूत किया गया है। अघोषित कटौती और लो-वोल्टेज जैसी समस्याओं में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।
बस स्टैंड पर आधुनिक प्रतीक्षालय
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बस स्टैंड में आधुनिक और सुविधायुक्त प्रतीक्षालयों का निर्माण कराया गया। अब यात्रियों को बस के इंतजार में सड़कों पर खड़ा नहीं रहना पड़ता।
जनता की आवाज: “पहली बार देखा ऐसा प्रशासक”
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्होंने जिले में कई अधिकारी देखे, लेकिन कलेक्टर संजय कन्नौजे ने प्रशासन और आम जनता के बीच की दूरी खत्म कर दी है।
लोग कहते हैं—
“जब कलेक्टर खुद सड़कों पर उतरकर व्यवस्था देखे और आम आदमी की तरह बाजार में मिले, तो समझिए जिला सही हाथों में है। उन्होंने सिर्फ सड़कें नहीं बनाईं, जनता का भरोसा भी जीता है।”
निष्कर्ष
कलेक्टर संजय कन्नौजे की दोहरी भूमिका—एक संवेदनशील पिता और एक सख्त, कर्मठ प्रशासक—आज पूरे छत्तीसगढ़ में मिसाल बन रही है। उनके नेतृत्व में सारंगढ़-बिलाईगढ़ न केवल विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, बल्कि सुशासन की एक नई परिभाषा भी गढ़ रहा है।




