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बेटे से मारपीट के मामले में एफआईआर नहीं होने पर तहसीलदार बैठे आमरण अनशन पर, पढ़े पूरी खबर,,,,,,,,

कलेक्टर के गनमैन पर मारपीट का आरोप, 6 घंटे के धरने के बाद देर रात दर्ज हुआ अपराध

सारंगढ़,
सारंगढ़ में कानून-व्यवस्था उस समय सवालों के घेरे में आ गई, जब एक पीड़ित की एफआईआर दर्ज कराने के लिए स्वयं तहसीलदार को सिटी कोतवाली थाना के बाहर आमरण अनशन पर बैठना पड़ा। मामला कलेक्टर के गनमैन द्वारा तहसीलदार के पुत्र से कथित मारपीट का है, जिसमें दो दिन तक कार्रवाई नहीं होने से नाराज तहसीलदार ने यह कड़ा कदम उठाया।

दीपिका (कोरबा) में पदस्थ तहसीलदार बंदेराम भगत, जो पूर्व में सारंगढ़ में नायब तहसीलदार रह चुके हैं, गुरुवार शाम करीब 5 बजे सिटी कोतवाली थाना के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए। उनके पुत्र राहुल भगत (25 वर्ष) के साथ मारपीट की घटना के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होने से वे आक्रोशित थे।

ट्रैफिक विवाद में मारपीट का आरोप

पीड़ित राहुल भगत ने बताया कि 20 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 3 बजे वह भारतमाता चौक के पास ट्रैफिक में फंसा हुआ था। उसी दौरान कलेक्टर के वाहन के लिए रास्ता खाली कराया जा रहा था। आरोप है कि कलेक्टर के गनमैन हरीश चंद्रा ने गाड़ी सही तरीके से न चलाने को लेकर गाली-गलौच की। विरोध करने पर गनमैन ने राहुल के गाल और कान के पास थप्पड़ मारा, जिससे कान से खून निकलने लगा। इसके बाद उसे जमीन पर गिराकर पैर से भी हमला किया गया।

घटना के दिन ही राहुल भगत ने सिटी कोतवाली थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी और मेडिकल के लिए जिला अस्पताल भेजा गया, लेकिन इसके बावजूद दो दिन तक कोई अपराध दर्ज नहीं किया गया।

धरने से मचा हड़कंप

एफआईआर दर्ज नहीं होने से नाराज तहसीलदार बंदेराम भगत ने बताया कि 20 से 22 जनवरी तक उन्हें केवल आश्वासन देकर टालते रहे। थाना प्रभारी द्वारा फोन रिसीव न किए जाने से आहत होकर उन्होंने आमरण अनशन शुरू कर दिया। तहसीलदार के धरने पर बैठते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीओपी स्नेहिल साहू मौके पर पहुंचीं और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। वहीं, खबर मीडिया और सोशल मीडिया पर फैलते ही मामला राजधानी रायपुर तक पहुंच गया। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सहित कई नेताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

देर रात दर्ज हुआ अपराध

लगातार बढ़ते दबाव के बाद देर रात सिटी कोतवाली पुलिस ने कलेक्टर के गनमैन हरीश चंद्रा के खिलाफ बीएनएस की धारा 296 एवं 115(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया। इसके बाद रात करीब 11:30 बजे तहसीलदार ने अपना धरना समाप्त किया।

आरोपी पक्ष से संपर्क का प्रयास

मामले में आरोपी गनमैन हरीश चंद्रा से दूरभाष पर संपर्क किया गया। उन्होंने फोन रिसीव करते हुए कहा कि “बाद में बात करूँगा” और इसके बाद फोन काट दिया। समाचार लिखे जाने तक आरोपी पक्ष की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।

सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब एक तहसीलदार को अपने बेटे के लिए न्याय पाने हेतु थाने के सामने अनशन करना पड़े, तो आम नागरिक, गरीब, मजदूर और महिलाओं की सुनवाई की स्थिति क्या होगी। यह घटना कोतवाली थाना की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

शाम से देर रात तक करीब 5–6 घंटे सिटी कोतवाली क्षेत्र में गहमागहमी का माहौल बना रहा। सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के नेता पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए थे और राजधानी स्तर पर लगातार जानकारी साझा की जा रही थी।

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