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75 साल से आस्था का संगम, छाता डीह में तीन दिवसीय मकर संक्रांति मेला

नाला के बीच स्थित अद्भुत कुंड से प्रकट शिवलिंग बना आस्था का केंद्र

सारंगढ़ जिला मुख्यालय से लगभग 10किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत छाता डीह में तीन दिवसीय मकर संक्रांति मेला बीते करीब 75 वर्षों से श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया जा रहा है। यह मेला न केवल क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि अपने अद्भुत प्राकृतिक और धार्मिक स्वरूप के कारण दूर-दराज के श्रद्धालुओं को भी आकर्षित करता है।
ग्राम पंचायत के सरपंच के अनुसार इस मेले की सबसे खास बात वह कुएँनुमा कुंड है, जो एक नाले के ऊपर स्थित है। आश्चर्यजनक रूप से इस कुंड में सालभर 12 महीने पानी भरा रहता है और उसमें से लगातार हल्का-हल्का पानी बाहर निकलता रहता है। इसी कुंड से पत्थर का शिवलिंग प्रकट हुआ, जिसके बाद से यहां मकर संक्रांति मेला आयोजित होने लगा।
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि कुंड का जल पवित्र और चमत्कारी है। मकर संक्रांति के अवसर पर यहां शिवलिंग का विशेष पूजन-अर्चन किया जाता है। तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले में आसपास के गांवों सहित दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मेले के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और पारंपरिक मेलों का आयोजन होता है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति और उत्सव के रंग में रंग जाता है। ग्रामीणों की सहभागिता और परंपरागत आस्था ने इस मेले को पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रखा है।
आज भी छाता डीह का मकर संक्रांति मेला लोकआस्था, प्रकृति और परंपरा का अनूठा संगम बनकर क्षेत्र की धार्मिक पहचान बना हुआ है।

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