सारंगढ़–बिलाईगढ़ में रेत घाटों पर अवैध उत्खनन, खनिज विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में, पढ़े पूरी खबर,,,,,,

ठेका हो चुका, अनुमति नहीं—फिर भी रेत की लूट जारी
सारंगढ़–बिलाईगढ़। जिले में रेत घाटों का ठेका तो हो चुका है, लेकिन शासन द्वारा रेत उत्खनन व संचालन की विधिवत अनुमति अभी तक नहीं दी गई है। इसके बावजूद रेत घाटों में अवैध उत्खनन और परिवहन धड़ल्ले से जारी है। यह स्थिति न सिर्फ नियमों की खुली अवहेलना है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और संरक्षण की आशंका को भी जन्म देती है।
अनुमति से पहले ही शुरू हो गया अवैध कारोबार
जानकारी के अनुसार सारंगढ़ विकासखंड में 2, बिलाईगढ़ ब्लॉक में 2 और बरमकेला ब्लॉक में 1 रेत घाट स्वीकृत है। कुछ घाटों की नीलामी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि कुछ प्रक्रियाधीन हैं। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि शासन से संचालन की अंतिम अनुमति अब तक जारी नहीं हुई है, न ही रॉयल्टी व्यवस्था लागू की गई है। इसके बावजूद जशपुरकछार, दहिदा और घोटला क्षेत्रों में खुलेआम रेत की खुदाई और ढुलाई हो रही है।
पोकलैंड मशीनें, सैकड़ों वाहन रोज
दहिदा और जशपुरकछार रेत घाटों में पोकलैंड मशीन लगाकर भारी मात्रा में रेत निकाली जा रही है। प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टर और हाईवा जैसे भारी वाहनों से रेत का परिवहन किया जा रहा है। ट्रैक्टर चालकों से रॉयल्टी के नाम पर अवैध वसूली की भी शिकायतें सामने आ रही हैं, जबकि शासन को एक रुपये का भी वैधानिक राजस्व नहीं मिल रहा।
महानदी तक बनाई गई अस्थायी सड़क
अवैध उत्खनन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महानदी के किनारे तक हाईवा पहुंचाने के लिए अस्थायी सड़क तक बना दी गई है। इससे साफ है कि यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से संचालित हो रहा है।
जब अनुमति नहीं, तो किसके इशारे पर चल रहा उत्खनन?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शासन ने अभी तक रेत घाटों के संचालन की अनुमति नहीं दी है, तो फिर भारी मशीनें, सैकड़ों वाहन और वसूली का यह तंत्र किसके संरक्षण में चल रहा है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनिज विभाग को सब कुछ पता होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।
पर्यावरण और राजस्व दोनों को नुकसान
यदि समय रहते इस अवैध उत्खनन पर रोक नहीं लगी, तो शासन को भारी राजस्व हानि के साथ-साथ नदी तंत्र और पर्यावरण को भी अपूरणीय क्षति होगी।
अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका
इस संबंध में खनिज अधिकारी पैंकरा से दूरभाष के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हो सका अब देखना यह है कि शासन की अनुमति से पहले ही चल रहे इस रेत माफिया के खेल पर प्रशासन कब और कैसे लगाम लगाता है।




