ड्राइवरों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण के लिए उठी मजबूत आवाज, छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंघ ने सौंपा मांगपत्र, पढ़े पूरी खबर,,,,,,,,

विशालपुर सारंगढ़ नईदुनिया दिलीप टंडन 🖊️🖊️🖊️
सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंघ, शाखा सारंगढ़-बिलाईगढ़ द्वारा चालक वर्ग की सुरक्षा, सामाजिक सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री एवं श्रम मंत्री के नाम विस्तृत मांगपत्र सौंपा गया। महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश के लाखों चालक दिन-रात परिवहन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन आज भी उन्हें पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा और सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष पूनम रात्रे, प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश निर्मलकर, प्रदेश कोषाध्यक्ष सोनु रात्रे, प्रदेश महामंत्री नईम खान तथा जिला अध्यक्ष विशम्भर साहू के नेतृत्व में सौंपे गए मांगपत्र में चालक हितों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया गया है। संगठन ने मांग की है कि किसी चालक की मृत्यु होने पर उसके परिवार को 20 लाख रुपये का बीमा कवरेज दिया जाए तथा दुर्घटना में स्थायी अपंगता की स्थिति में 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। साथ ही दुर्घटना में घायल चालकों के उपचार के लिए विशेष सहायता योजना लागू की जाए।
महासंघ ने सड़क सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की। मांगपत्र में कहा गया है कि राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर घूमने वाले मवेशियों और अन्य जानवरों को हटाने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए तथा नियमित अभियान चलाकर दुर्घटनाओं की संभावनाओं को कम किया जाए। संगठन का कहना है कि सड़क हादसों का एक बड़ा कारण हाईवे पर विचरण करने वाले पशु हैं, जिससे चालक और यात्रियों की जान जोखिम में पड़ती है।
संगठन ने सार्वजनिक हिंसा अथवा हमलों का शिकार होने वाले चालकों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाने की मांग भी उठाई है। महासंघ का कहना है कि कई बार सड़क पर विवाद अथवा अन्य घटनाओं में चालक हिंसा का शिकार हो जाते हैं, ऐसे मामलों में उन्हें विशेष कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।
मांगपत्र में चालकों को द्वितीय श्रेणी सैनिक का दर्जा देने तथा 55 वर्ष की आयु के बाद मासिक भत्ता प्रदान करने की मांग भी शामिल है। संगठन का मानना है कि चालक वर्ग लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में कार्य करता है, इसलिए उन्हें सम्मानजनक सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।
महासंघ ने प्रत्येक 100 किलोमीटर की दूरी पर वाहनों के लिए पार्किंग स्थल, चालकों के विश्राम कक्ष, शौचालय और स्नानागार की व्यवस्था किए जाने की मांग की है। इसके अलावा प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक सड़कों पर चालकों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किए जाने की भी मांग रखी गई।
चालकों के आवास और उनके परिवारों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए संगठन ने प्रधानमंत्री एवं राज्य आवास योजनाओं के तहत मकान निर्माण के लिए 5 लाख रुपये की सहायता राशि तथा चालक परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा की विशेष व्यवस्था करने की मांग की है। आर्थिक राहत के तहत ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित निर्धारित 12 हजार रुपये की राशि को समाप्त करने अथवा उसका पुनर्मूल्यांकन करने की मांग भी की गई है, ताकि गरीब और जरूरतमंद चालकों को राहत मिल सके।
स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग करते हुए महासंघ ने कहा कि प्रदेश के उद्योगों एवं औद्योगिक इकाइयों में कम से कम 70 प्रतिशत रोजगार छत्तीसगढ़ के ड्राइवरों को दिया जाए। वहीं वर्तमान में रायपुर में संचालित प्रशिक्षण केंद्रों की तर्ज पर प्रत्येक जिले में ड्राइवर प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की मांग की गई, जिससे दूर-दराज के चालकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
संगठन ने आपातकालीन सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक पुलिस चौकी में फायर ब्रिगेड सुविधा उपलब्ध कराने, सभी जिलों में वाहन फिटनेस केंद्र स्थापित करने तथा राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर रात्रिकालीन पेट्रोलिंग बढ़ाने की मांग भी उठाई। महासंघ का कहना है कि रात के समय डीजल चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए संवेदनशील एवं औद्योगिक क्षेत्रों में नियमित गश्त आवश्यक है।
इसके अलावा संगठन ने 1 सितंबर को “ड्राइवर दिवस” घोषित कर राष्ट्रीय स्तर पर चालक समुदाय को सम्मान देने की मांग भी की। महासंघ के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार चालक वर्ग की समस्याओं और मांगों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कदम उठाएगी, जिससे प्रदेश के लाखों ड्राइवरों को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर सुविधाएं मिल सकें।




