त्याग, तपस्या और समर्पण की मिसाल: 30 वर्षों की सेवा के बाद मणिप्रभा त्रिपाठी को भावभीनी विदाई, पढ़े पूरी खबर,,,,,,

स्कूल से घर बावाकुटी तक ढोल-नगाड़ों के साथ निकली भव्य विदाई यात्रा,
जहां-जहां रहीं, वहां खिली शिक्षा की बगिया—त्रिपाठी मैडम को शाल, श्रीफल, पुष्प गुच्छ से किया अभिनन्दन
विशालपुर नईदुनिया दिलीप टंडन
सहसपुर। शिक्षा के क्षेत्र में तीन दशकों तक समर्पित सेवाएं देने वाली शिक्षिका श्रीमती मणिप्रभा त्रिपाठी को शालेय परिवार द्वारा भावभीनी विदाई एवं सम्मान दिया गया। माध्यमिक शाला, प्राथमिक शाला एवं आंगनवाड़ी सहसपुर के समस्त शिक्षकगण, शाला प्रबंधन समिति, जनप्रतिनिधि, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में समारोह श्रद्धा और सम्मान के वातावरण में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत शालेय परिवार द्वारा त्रिपाठी मैडम को उनके निवास से ससम्मान वाहन द्वारा विद्यालय लाने के साथ हुई। विद्यालय परिसर में शाल एवं श्रीफल भेंट कर उनका अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर प्रभारी प्रधानाध्यापिका श्रीमती विजयलक्ष्मी गोपाल ने उनके 30 वर्षों के गौरवशाली कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि त्रिपाठी मैडम का त्याग, समर्पण और अनुशासन हम सभी के लिए प्रेरणा है। उनके सानिध्य में सीखे गए अनुभव जीवनभर मार्गदर्शन देते रहेंगे।

समारोह में उपस्थित अभिभावक एवं पत्रकार श्री दिलीप टंडन ने कहा कि त्रिपाठी मैडम का योगदान केवल विद्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने पूरे समाज को शिक्षित और संस्कारित करने का कार्य किया है। उनके पढ़ाए विद्यार्थी आज भी उनके आदर्शों को आत्मसात किए हुए हैं।

शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री अमित सारथी ने उन्हें मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उनका आशीर्वाद सदैव बना रहे, यही सभी की कामना है। उन्होंने विद्यालय को जो स्वरूप दिया है, उसे बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।

त्रिपाठी मैडम की सेवा यात्रा 25 जुलाई 1995 को प्राथमिक शाला चिखली, सारंगढ़ से प्रारंभ हुई। इसके बाद उन्होंने कन्या शाला सारंगढ़, डाइट धरमजयगढ़ में प्रतिनियुक्त व्याख्याता के रूप में सेवाएं दीं तथा एनसीईआरटी दिल्ली से शिशु शिक्षा एवं देखभाल में डिप्लोमा प्राप्त किया। वर्ष 2010 में उच्च वर्ग शिक्षक के रूप में माध्यमिक शाला सहसपुर में पदस्थ होकर उन्होंने विद्यालय को नई पहचान दी।
उनके कार्यकाल में विद्यालय का कायाकल्प हुआ। बंजर भूमि को उन्होंने हरे-भरे परिसर में बदलते हुए पुष्प वाटिका, किचन गार्डन, लर्निंग कॉर्नर और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था जैसे कई नवाचार किए। उनके प्रयासों से विद्यालय ने जिला ही नहीं, बल्कि राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई।

समारोह के दौरान उपस्थित जनसमुदाय ने भावुक होकर उन्हें विदाई दी। वातावरण गमगीन हो गया, वहीं सभी ने उनके स्वस्थ, सुखद एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।स्कूल से उनके निवास बावाकुटी तक ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य विदाई यात्रा निकाली गई, जिसमें प्रभारी प्रधानपाठक श्रीमती विजयलक्ष्मी गोपाल, श्रीमती सरिता देवांगन, श्री संजय कुमार जायसवाल, श्री गौरी शंकर साहू, श्रीमती नजनीन शेख, सुश्री सुमित्रा चौहान, श्रीमती बिमला यादव, श्रीमती दुर्गा यादव, श्रीमती लक्ष्मीन पटेल, श्री ढालेन्द्र कुमार जोल्हे, श्री अमित सारथी, श्री दिलीप कुमार टंडन, श्रीमती शगुन सिदार, श्रीमती शिव कुमारी यादव, सोनिया खर्रा, रोशनी यादव, राधिका यादव, सुमन निषाद सहित बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे और ग्रामवासी उत्साहपूर्वक शामिल हुए, जिससे पूरा वातावरण भावुकता और सम्मान से भर उठा।
स्कूल से उनके निवास बावाकुटी तक ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य विदाई यात्रा निकाली गई, जिसमें प्रभारी प्रधानपाठक श्रीमती विजयलक्ष्मी गोपाल, श्रीमती सरिता देवांगन, श्री संजय कुमार जायसवाल, श्री गौरी शंकर साहू, श्रीमती नजनीन शेख, सुश्री सुमित्रा चौहान, श्रीमती बिमला यादव, श्रीमती दुर्गा यादव, श्रीमती लक्ष्मीन पटेल, श्री ढालेन्द्र कुमार जोल्हे, श्री अमित सारथी, श्री दिलीप कुमार टंडन, श्रीमती शगुन सिदार, श्रीमती शिव कुमारी यादव, सोनिया खर्रा, रोशनी यादव, राधिका यादव, सुमन निषाद सहित बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे और ग्रामवासी उत्साहपूर्वक शामिल हुए, जिससे पूरा वातावरण भावुकता और सम्मान से भर उठा।
शालेय परिवार ने आशा व्यक्त की कि सेवानिवृत्ति के बाद भी त्रिपाठी मैडम अपने अनुभव और मार्गदर्शन से क्षेत्र के विद्यालयों को नई दिशा देती रहेंगी।




