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महतारी वंदन से आत्मनिर्भर बनी भगवती रात्रे, सिलाई से हर माह कमा रहीं 5 हजार, पढ़े पूरी खबर,,,,

पति की दुर्घटना के बाद संभाली परिवार की जिम्मेदारी, योजना बनी सहारा

सारंगढ़, नईदुनिया दिलीप टंडन

सारंगढ़- बरमकेला विकासखंड के ग्राम पंचायत संडा की निवासी भगवती रात्रे ने विपरीत परिस्थितियों में हिम्मत और मेहनत का परिचय देते हुए आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उनके जीवन को नई दिशा दी और आज वे सिलाई कार्य के जरिए अपने परिवार का सफलतापूर्वक भरण-पोषण कर रही हैं।

भगवती रात्रे के परिवार में उनके पति और तीन वर्ष की बेटी सहित कुल तीन सदस्य हैं। विवाह के बाद पारिवारिक कारणों से उन्हें ससुराल से अलग रहना पड़ा। परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके पति पर थी, जो मजदूरी कर घर चलाते थे। लेकिन एक दुर्घटना में पति के गंभीर रूप से घायल हो जाने के बाद वे काम करने में असमर्थ हो गए, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई। दैनिक खर्च, इलाज और बच्चे की जरूरतें पूरी करना चुनौती बन गया।

इसी कठिन दौर में महतारी वंदन योजना उनके जीवन में उम्मीद की किरण बनकर आई। योजना के तहत मिलने वाली एक हजार रुपये की मासिक सहायता राशि में से भगवती ने हर महीने थोड़ी-थोड़ी बचत शुरू की। उनकी यह सूझबूझ रंग लाई और बचत से उन्होंने 6 हजार रुपये की सिलाई मशीन खरीदकर स्वरोजगार की शुरुआत की।

अपने हुनर और लगन के दम पर भगवती ने जल्द ही पहचान बना ली। आज वे सिलाई से प्रतिमाह लगभग पांच हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इस आय से वे परिवार का खर्च उठाने के साथ ही पति के इलाज में सहयोग कर रही हैं और बेटी की पढ़ाई व अन्य आवश्यकताओं को भी पूरा कर पा रही हैं।

महतारी वंदन योजना ने भगवती को केवल आर्थिक सहारा ही नहीं दिया, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान के साथ जीवन जीने की ताकत भी दी है। अब वे अपने पैरों पर खड़ी हैं और क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं। यह कहानी बताती है कि समय पर मिली सही सहायता महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

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