पत्रकारों की सजगता से 8 लाख की योजना पर लगी रोक, जांच में मीडिया रिपोर्ट सही साबित, पढ़े पूरी खबर,,,,

कागजों में चल रही थी 8 लाख की योजना, पत्रकारों ने खोली पोल
सारंगढ़–बिलाईगढ़।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की जिम्मेदारी निभाते हुए पत्रकारों की सजगता एक बार फिर जनहित में प्रभावी साबित हुई है। विकासखंड सारंगढ़ के ग्राम लिमगांव में लगभग 8 लाख रुपये की लागत से संचालित बांस शिल्प प्रशिक्षण योजना में गंभीर गड़बड़ी को मीडिया हाउस ने मौके पर निरीक्षण कर उजागर किया था। पर्याप्त प्रशिक्षार्थियों के अभाव में केवल कागजों पर प्रशिक्षण चलाए जाने की सच्चाई सामने लाते हुए इस संबंध में सीधे कलेक्टर से शिकायत की गई थी।

मीडिया रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर जनदर्शन के माध्यम से प्राप्त शिकायत पर उपवनमंडलाधिकारी सारंगढ़ के नेतृत्व में जांच दल गठित कर मामले की जांच कराई गई। जांच दल द्वारा 3 दिसंबर 2025 को किए गए औचक निरीक्षण में यह तथ्य सामने आया कि प्रशिक्षण 3 नवंबर 2025 से प्रारंभ तो हुआ था, लेकिन ग्रामीणों की रुचि नहीं होने और पर्याप्त प्रशिक्षार्थियों के अभाव में यह महज 6 से 7 दिन ही औपचारिक रूप से संचालित हो सका। कई दिनों में उपस्थिति केवल 4 से 7 लोगों तक सीमित पाई गई।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि प्रशिक्षण की वास्तविक स्थिति वही थी, जिसे मीडिया हाउस ने अपनी खबर में उजागर किया था। प्रशिक्षार्थियों की कमी के कारण प्रशिक्षण को आगे चलाना संभव नहीं था, जिसके चलते अंततः योजना को रद्द करना पड़ा। इस प्रकार मीडिया में प्रकाशित खबर और प्रशासन को दी गई शिकायत पूरी तरह सही साबित हुई।
सबसे अहम पहलू यह रहा कि पत्रकारों की तत्परता और सजगता से समय रहते अनावश्यक शासकीय खर्च पर रोक लग सकी और योजना की जमीनी हकीकत सामने आ पाई। यदि मीडिया द्वारा सवाल नहीं उठाए जाते, तो कागजी प्रशिक्षण के नाम पर बड़ी राशि खर्च होने की आशंका बनी रहती।
पत्रकारिता की जीत
यह पूरा प्रकरण निष्पक्ष, निर्भीक और तथ्यपरक पत्रकारिता की ताकत को दर्शाता है। पत्रकारों ने न किसी दबाव में आए बिना और न ही चुप्पी साधकर, बल्कि ठोस साक्ष्यों के साथ सच सामने रखकर अपनी जिम्मेदारी निभाई।
स्थानीय लोगों और पत्रकार संगठनों ने इस कार्रवाई को पत्रकारिता की जीत बताते हुए कहा कि ऐसे उदाहरण नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। यह मामला यह भी संदेश देता है कि यदि मीडिया सजग और सक्रिय रहे, तो किसी भी स्तर की गड़बड़ी ज्यादा समय तक छिपी नहीं रह सकती।




