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शासकीय प्राथमिक शाला जेवरीडीह में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया शाला प्रवेश उत्सव, पढ़े पूरी खबर,,,,,,,

सारंगढ़। नवीन शिक्षा सत्र के शुभारंभ अवसर पर शासकीय प्राथमिक शाला जेवरीडीह में शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन बड़े हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ग्राम पंचायत सरपंच अशोक सिदार तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. दासरथी जांगड़े ने की। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में अडानी फाउंडेशन से डॉ. पटेल उपस्थित रहे। शाला प्रवेश उत्सव के प्रभारी लोकेन्द्र डनसेना ने भी अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई।

इस अवसर पर नवप्रवेशी बच्चों का तिलक लगाकर, पुष्पमाला पहनाकर एवं मिठाई खिलाकर आत्मीय स्वागत किया गया। विद्यालय परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। अतिथियों ने बच्चों को शिक्षा के महत्व के बारे में बताते हुए उन्हें मन लगाकर पढ़ाई करने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। साथ ही अभिभावकों से बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने का आग्रह किया।

मुख्य अतिथि अशोक सिदार ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है। उन्होंने बच्चों को अपने लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास करने की सीख दी तथा विद्यालय के विकास में हर संभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. दासरथी जांगड़े ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बच्चों के सर्वांगीण विकास का आधार बताते हुए अभिभावकों से शिक्षा के प्रति जागरूक रहने की अपील की।

विद्यालय के शिक्षक एस. कुमार सारथी, भुवनेश्वर सिदार एवं सीएसआर शिक्षिका मंजू चौहान ने उपस्थित अभिभावकों को शासकीय विद्यालयों में उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बच्चों को निःशुल्क प्रवेश, पाठ्यपुस्तक, गणवेश, मध्यान्ह भोजन सहित अनेक लाभकारी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। शिक्षकों ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें नियमित रूप से विद्यालय आने और शिक्षा के माध्यम से अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावक, ग्रामीणजन एवं विद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया और शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण निर्माण में सहयोग दिया। पूरे आयोजन का सफल संचालन एवं आभार प्रदर्शन विद्यालय परिवार द्वारा किया गया। शाला प्रवेश उत्सव के माध्यम से बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ तथा शिक्षा के महत्व का सकारात्मक संदेश समाज तक पहुंचा।

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