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राज्योत्सव में माँ वैष्णवी संगीत महाविद्यालय की छात्राओं ने कथक से मोहा मन, सितार-तबले की जुगलबंदी ने बांधा समां, पढ़े पूरी खबर,,,,,,

रायगढ़ घराने की कथक शैली में छात्राओं ने दी आकर्षक समूह एवं एकल प्रस्तुति, सितार के सुरों और तबले की थाप से गूंजा सांस्कृतिक मंच

विशालपुर सारंगढ़  नईदुनिया  दिलीप टंडन 🖊️🖊️🖊️🖊️

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला मुख्यालय में आयोजित राज्योत्सव 2026 का मंच कला, संगीत और संस्कृति की अनूठी प्रस्तुतियों का साक्षी बना। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस भव्य समारोह में माँ वैष्णवी संगीत महाविद्यालय, रानीसागर सारंगढ़ की छात्राओं एवं कलाकारों ने अपनी शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। रायगढ़ घराने की पारंपरिक कथक नृत्य शैली में प्रस्तुत समूह एवं एकल नृत्य ने जहां दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, वहीं सितार और तबले की मधुर जुगलबंदी ने पूरे आयोजन को संगीतमय बना दिया

।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सांसद राधेश्याम राठिया, वरिष्ठ नेता जगन्नाथ पाणिग्रही सहित अनेक जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं जिला कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों की मौजूदगी में माँ वैष्णवी संगीत महाविद्यालय की छात्राओं ने अपनी कला साधना, अनुशासन और नृत्य कौशल का परिचय देते हुए मंच पर शानदार प्रस्तुति दी। कथक नृत्य की पारंपरिक भाव-भंगिमाओं, आकर्षक पद संचालन, लयकारी और ताल के साथ कदमों के सुंदर समन्वय ने दर्शकों को कार्यक्रम के अंत तक बांधे रखा।

समूह कथक नृत्य की प्रस्तुति में राष्ट्रीय कथक नृत्यांगना यामी वैष्णव के साथ पूर्वी भगत, अदिति सुल्तानिया एवं एम्मा श्रुति कुजूर ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। चारों कलाकारों ने रायगढ़ घराने की विशिष्ट नृत्य परंपरा को अपनी भावपूर्ण अभिव्यक्ति और सधे हुए नृत्य संयोजन के माध्यम से मंच पर जीवंत कर दिया। उनकी एकरूपता, ताल के अनुरूप पद संचालन और प्रभावशाली भावाभिव्यक्ति को दर्शकों ने खूब सराहा। वहीं महाविद्यालय की कथक छात्रा अपेक्षा केशवानी एवं अनुषा केसरवानी ने एकल कथक नृत्य प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। दोनों छात्राओं की प्रस्तुतियों पर दर्शक दीर्घा तालियों से गूंज उठी।

राज्योत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम में नृत्य के साथ शास्त्रीय संगीत की भी विशेष छटा देखने को मिली। माँ वैष्णवी संगीत महाविद्यालय के प्राचार्य एल.डी. वैष्णव ने सितार वादन की प्रस्तुति दी, जबकि बजरंग चौहान ने तबले पर प्रभावशाली संगत की। सितार के मधुर सुरों और तबले की सधी हुई थाप के बीच तालमेल ने श्रोताओं को शास्त्रीय संगीत की सुंदर अनुभूति कराई। दोनों कलाकारों की सांगीतिक जुगलबंदी ने समारोह के वातावरण को सुरमय बना दिया। दर्शकों ने इस प्रस्तुति का आनंद लेते हुए कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

उल्लेखनीय है कि माँ वैष्णवी संगीत महाविद्यालय, रानीसागर सारंगढ़ द्वारा संगीत और नृत्य के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के साथ भारतीय शास्त्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। राज्योत्सव जैसे प्रतिष्ठित आयोजन में महाविद्यालय की छात्राओं और कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलना संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि रहा।

महाविद्यालय परिवार ने इस अवसर पर जिला प्रशासन सारंगढ़-बिलाईगढ़ के प्रति आभार व्यक्त किया। संस्थान का कहना है कि राज्योत्सव जैसे बड़े मंच कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ ही प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक कलाओं को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का अवसर प्रदान करते हैं।

इस आयोजन में रायगढ़ कथक घराने की परंपरा, शास्त्रीय संगीत की मधुरता और नई पीढ़ी की कलात्मक प्रतिभा का सुंदर संगम देखने को मिला। माँ वैष्णवी संगीत महाविद्यालय की छात्राओं एवं कलाकारों की प्रस्तुतियों ने राज्योत्सव 2026 को यादगार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

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