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सेवा की कहानी : बिहान से बदली गीता की जिंदगी, सब्जियों की खेती से कमाए करीब 2 लाख रूपए, पढ़े,पुरी खबर,,,,

50 हजार रूपए के उद्यमी ऋण ने खोली आत्मनिर्भरता की राह, बकरी पालन बना आय का दूसरा सहारा

80 डिसमिल खेत में टमाटर, खीरा और करेला उत्पादन से रोजाना 3 से 4 हजार रूपए तक की आमदनी

विशालपुर सारंगढ़ नईदुनिया दिलीप टंडन

सारंगढ़–बिलाईगढ़, शासन की योजनाएं जब जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचती हैं तो सहायता की छोटी-सी शुरुआत भी जीवन में बड़े बदलाव का आधार बन जाती है। सारंगढ़ विकासखंड के ग्राम जेवरा की श्रीमती गीता मिरी की कहानी भी ऐसे ही बदलाव की तस्वीर पेश करती है। कभी घरेलू कामकाज तक सीमित रहने वाली गीता के पास स्वयं की नियमित आमदनी का कोई मजबूत जरिया नहीं था। बिहान योजना से जुड़ने और आर्थिक सहयोग मिलने के बाद उन्होंने अपने खेत को आजीविका का आधार बनाया। आज सब्जियों से भरा उनका खेत और बकरी पालन से होने वाली अतिरिक्त आमदनी उनकी आत्मनिर्भरता की कहानी कह रही है।

बिहान ने दिया साथ तो मेहनत को मिली नई दिशा

गीता समूह से जुड़ने के बाद श्रीमती गीता मिरी को बिहान योजना के माध्यम से 50 हजार रूपए का उद्यमी ऋण मिला। इस राशि को उन्होंने रोजमर्रा की जरूरतों में खर्च करने के बजाय अपनी आजीविका बढ़ाने में लगाया। करीब 80 डिसमिल खेत में टमाटर, खीरा और करेला जैसी सब्जियों का उत्पादन शुरू किया। मेहनत रंग लाई और खेत से बेहतर पैदावार मिलने लगी। धीरे-धीरे यही खेती उनके परिवार की आय का मजबूत जरिया बन गई।
गीता अब तक सब्जी उत्पादन से करीब 2 लाख रूपए की आय अर्जित कर चुकी हैं। एक फसल से उन्हें लगभग 60 हजार रूपए तक की कमाई हुई है। बेहतर उत्पादन और बाजार में मांग रहने के दौरान सब्जियों की बिक्री से उन्हें प्रतिदिन करीब 3 से 4 हजार रूपए तक की आमदनी भी हो जाती है। कभी स्वयं की आय का स्थायी साधन नहीं रखने वाली गीता अब अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक जरूरतों में महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रही हैं।

खेती के साथ बकरी पालन ने बढ़ाई आर्थिक मजबूती

गीता ने अपनी आजीविका को केवल सब्जी उत्पादन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने बकरी पालन को भी आय के दूसरे साधन के रूप में अपनाया है। इससे उन्हें सालभर में करीब 50 हजार रूपए तक का लाभ मिल जाता है। खेती और पशुपालन के रूप में आय के दो अलग-अलग स्रोत तैयार होने से परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में मजबूत हुई है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में भी सहूलियत मिली है।
श्रीमती गीता मिरी बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। बिहान योजना से मिले सहयोग और उद्यमी ऋण ने उन्हें स्वयं का काम शुरू करने का अवसर दिया। अपने हाथों की मेहनत से होने वाली कमाई ने उनमें नया आत्मविश्वास पैदा किया है। इसके लिए वे बिहान योजना के प्रति आभार व्यक्त करती हैं।
गीता की यह यात्रा बताती है कि बिहान योजना के माध्यम से समूह की ताकत, वित्तीय सहयोग और स्वरोजगार का अवसर ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को नई दिशा दे रहा है। जेवरा की गीता आज अपने परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बनने के साथ आसपास की महिलाओं को भी समूह से जुड़कर स्वरोजगार की राह अपनाने और अपने पैरों पर खड़े होने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

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