खिचरी में हरियाली की क्रांति: शिक्षिका सुनीता यादव के नेतृत्व में तैयार हो रहे एक लाख सीड बॉल”पढ़े पूरी खबर,,,,,,,

सामाजिक सहभागिता और सामूहिक प्रयास से पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पहल
विशालपुर सारंगढ़ नईदुनिया दिलीप टंडन
सारंगढ़-बिलाईगढ़,
धरती हमें लगातार संकेत दे रही है—बढ़ता तापमान, जंगलों में आग की घटनाएँ, समुद्र स्तर में वृद्धि और 48 डिग्री से ऊपर जाते पारे के बीच अब पर्यावरण संरक्षण केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता बन चुका है। इसी भावना को साकार रूप देने का कार्य कर रही हैं ग्राम खिचरी की शिक्षिका सुनीता यादव, जिन्होंने “सीड बॉल” निर्माण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर खिचरी स्कूल में इस अनूठी पहल की शुरुआत की गई, जिसमें शिक्षिका सुनीता यादव के साथ उनकी पूर्व छात्राएँ, गांव की महिलाएँ, स्कूल की पालक माताएँ, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएँ तथा बिहान समूह की दीदियाँ सक्रिय रूप से शामिल हुईं। सभी मिलकर गोबर और मिट्टी को मिलाकर छोटे-छोटे गेंदनुमा आकार में फलदार और छायादार वृक्षों के बीज तैयार कर रही हैं, जिन्हें “सीड बॉल” कहा जाता है।
यह सीड बॉल आने वाले जुलाई माह में वर्षा ऋतु के साथ जंगलों, खाली जमीनों और बंजर क्षेत्रों में फैलाए जाएंगे, जिससे प्राकृतिक रूप से नए पौधे अंकुरित होकर हरियाली को पुनर्जीवित कर सकें।
शिक्षिका सुनीता यादव का कहना है कि आज के समय में जब पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है, तब केवल शासन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पर्यावरण संरक्षण में योगदान देना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और हरित धरती बचाई जा सके।
इस अभियान में सरई, साजा, आम, नीम, नींबू, जामुन, सीताफल, करंज, मुनगा, पीपल, बरगद और कटहल जैसे महत्वपूर्ण फलदार एवं छायादार वृक्षों के बीज शामिल किए गए हैं।
यह पहल केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य बच्चों और ग्रामीण समुदाय में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता विकसित करना भी है। संदेश स्पष्ट है—“वन है तो जीवन है”।
इस अभियान में पूर्व सरपंच सुशीला सिदार, मितानिन सोनिया पटेल, पालक उत्तरा निषाद, आशा चौहान, बिहान सदस्य भानुमती महंत तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गुरबारी चौहान का विशेष सहयोग रहा।
गांव में इस अभियान के तहत आठ दिनों के भीतर एक लाख सीड बॉल तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जो इसे क्षेत्र की अब तक की सबसे बड़ी सामूहिक पर्यावरणीय पहल बनाता है।




