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जल, जंगल, जमीन और आस्था की अनूठी कहानी लेकर आ रही छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘भुईंया’, एआई तकनीक का भी हुआ प्रयोग, पढ़े पूरी खबर,,,,,,,,

सारंगढ़ में फिल्म की टीम ने की प्रेसवार्ता, दर्शकों से समर्थन की अपील

विशालपुर सारंगढ़ नईदुनिया दिलीप टंडन

सारंगढ़। छत्तीसगढ़ी सिनेमा को नई दिशा देने वाली बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘भुईंया’ जल्द ही सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म के निर्माता शेखर सोनी (उदय) एवं कलाकारों की टीम ने सारंगढ़ पहुंचकर स्थानीय पत्रकारों से चर्चा की और फिल्म की विशेषताओं से अवगत कराया।

प्रेसवार्ता के दौरान निर्माता शेखर सोनी ने बताया कि ‘भुईंया’ केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, आस्था, प्रकृति और सामाजिक सरोकारों को पर्दे पर जीवंत करने का प्रयास है। फिल्म में आम नागरिकों को सरकारी कार्यों में आने वाली समस्याओं, ग्रामीण जीवन की चुनौतियों तथा समाज की वास्तविक परिस्थितियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

उन्होंने बताया कि फिल्म में पहली बार वन, वन्य प्राणी, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। साथ ही फिल्म निर्माण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का प्रयोग किया गया है, जो छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग के लिए एक नई पहल मानी जा रही है। इस नवाचार के कारण फिल्म को तकनीकी रूप से भी विशेष और आकर्षक बनाने का प्रयास किया गया है।

फिल्म की कहानी छत्तीसगढ़ की लोकआस्था और देवी पताई माता से प्रेरित है। इसमें जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों के साथ प्रकृति और संस्कृति के गहरे संबंध को दर्शाया गया है। फिल्म का संदेश छत्तीसगढ़ की मिट्टी, परंपरा और जनजीवन से जुड़ा हुआ है, जो दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का काम करेगा।

फिल्म के गीत भी पहले से ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। विशेष रूप से गीत “पग-पग म यहां बसे जिंदगी”, “कण-कण म भगवान हे”, “ए भुईंया महान हे, हमर भगवान हे” लोगों की जुबान पर चढ़ने लगे हैं। इन गीतों में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, प्रकृति और मातृभूमि के प्रति सम्मान की भावना झलकती है।

प्रेसवार्ता में मौजूद कलाकारों ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ी फिल्मों को आगे बढ़ाने और स्थानीय कला-संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए अधिक से अधिक संख्या में सिनेमाघरों तक पहुंचें तथा फिल्म ‘भुईंया’ को अपना समर्थन दें।

फिल्म से जुड़े लोगों का कहना है कि ‘भुईंया’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान, संस्कृति, आस्था और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला एक सशक्त माध्यम है। यही वजह है कि फिल्म को लेकर दर्शकों में उत्सुकता लगातार बढ़ रही है।

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